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ट्रैक पर दौड़ती हरियाणा की 10 साल की उड़नपरी हरनूर, 3 साल में जीत लिए 215 पदक; पीटी उषा बनने का सपना

Published: Sun, 11 Oct 2026 06:00 AM (IST)

यमुनानगर की 10 वर्षीय हरनूर तोमर ने मात्र तीन साल में 215 पदक जीतकर अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया ...और पढ़ें

हरियाणा की 10 साल की उड़नपरी हरनूर तोमर। फोटो जागरण

हरियाणा की 10 साल की उड़नपरी हरनूर तोमर। फोटो जागरण

HighLights

  1. 10 वर्षीय हरनूर तोमर ने जीते 215 पुरस्कार।

  2. रोज सुबह 3:30 बजे उठकर करती हैं अभ्यास।

  3. पीटी उषा और पिता से मिली ओलिंपिक प्रेरणा।

राहुल शर्मा, यमुनानगर। जब ज्यादातर बच्चे सुबह गहरी नींद में होते हैं, तब जगाधरी के केसरनगर की 10 वर्षीय हरनूर तोमर अपने ख्वाब हकीकत में बदलने के लिए मैदान में पसीना बहा रही होती हैं। आंखों में ओलिंपिक में पदक जीतने का अरमान लिए हरनूर रोज तड़के साढ़े तीन बजे बिस्तर छोड़ देती हैं, फिर चार बजे तेजली स्टेडियम में अभ्यास करती हैं।

इसी लगन में पहले कोच एवं पुराने एथलीट रहे पिता पदम से संघर्ष व अनुशासन सीखकर हरनूर सिर्फ तीन साल में 215 (90 ट्राफी व 125 मेडल) पुरस्कार अपने नाम कर चुकी हैं। इनमें 15 राष्ट्रीय व 50 से अधिक राज्य स्तरीय पुरस्कार शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर हरनूर की कहानी मेहनत, संघर्ष व अनुशासन की ऐसी मिसाल है, जो दूसरी बेटियों को भी बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती है।

उम्र छोटी-हौसले बड़े : ट्रैक पर बड़ों को देती चुनौती

सेक्टर-18 स्थित लोटस वैली स्कूल में पांचवीं कक्षा की हरनूर की दिनचर्या किसी पेशेवर खिलाड़ी से कम नहीं है। सुबह साढ़े सात बजे अभ्यास से घर लौटने पर वह स्कूल जाती है। दोपहर ढाई बजे घर लौटकर चार बजे ट्यूशन व शाम छह से आठ बजे तक जिम्नास्टिक का अभ्यास करती हैं।

खेल के प्रति समर्पण को देख स्कूल ने उसे 15-20 मिनट देरी से पहुंचने की छूट भी दी है। हाल ही में नौ अक्टूबर को दैनिक जागरण की ओर से प्रेरणा सप्ताह के तहत तेजली स्टेडियम में आयोजित मैराथन में भी हरनूर ने अपने से दो से तीन गुना अधिक उम्र की प्रतिभागियों को पीछे छोड़कर पहला स्थान पाया।

पिता पहले कोच, मां का साथ और ओलिंपिक का ख्वाब

हरनूर को खेल की प्रेरणा अपने पिता पदम से मिली, जो खुद एथलीट रहे और जिला स्तर पर कई पदक जीतकर राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पदम ने कोच बनने के लिए एनआइएस कोर्स किया और फिलहाल बीपीएड कर रहे हैं। सरकारी कोच या स्कूल में पीटीआइ बनने का लक्ष्य रखने वाले पदम तेजली स्टेडियम में खिलाड़ियों व सेना में भर्ती के इच्छुक किशोरों व युवाओं को निश्शुल्क प्रशिक्षण देते हैं।

पदम ने ही हरनूर को तीन साल तक अभ्यास कराया। मां नेहा ब्यूटी पार्लर चलाती हैं और बेटी के सपनों को पूरा करने में परिवार का साथ देती हैं। हरनूर भारतीय धाविका पीटी उषा व अपने पिता को आदर्श मानती हैं। पदम व नेहा ने बताया कि मोबाइल से दूरी व समय की पाबंदी हरनूर की दिनचर्या का अहम हिस्सा हैं। बचपन में उसे सुबह उठने की आदत डलवाई, पर अब एक आवाज पर वह मैदान जाने के लिए तैयार हो जाती है।