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सोनीपत स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक संकट: आधे से ज्यादा अफसरों की कुर्सियां खाली, 17 उच्च पद रिक्त

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:44 PM (IST)

सोनीपत जिले में सरकारी स्वास्थ्य ढांचा प्रशासनिक अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है, जहां 33 में से 17 उच्च पद खाली हैं।

डॉ. अलंकृता गेरा, सिविल सर्जन, सोनीपत

डॉ. अलंकृता गेरा, सिविल सर्जन, सोनीपत

HighLights

  1. सोनीपत में 33 में से 17 प्रशासनिक स्वास्थ्य पद रिक्त।

  2. एसएमओ के 21 में से 11 पद खाली, मरीजों का इलाज प्रभावित।

  3. अधिकारियों की कमी से स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी ठप।

संदीप कुमार, सोनीपत। जिले में सरकारी स्वास्थ्य ढांचा सिर्फ डॉक्टर की कमी से ही नहीं जूझ रहा, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करने वाले अधिकारियों का टोटा बना हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग में उच्च प्रशासनिक स्तर के कुल 33 स्वीकृत पदों में से 17 पद रिक्त पड़े हैं। आधे से ज्यादा अफसरों की कुर्सियां खाली होने के कारण जिले के 47 स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी और लोगो को मिलने वाला इलाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के सुचारू संचालन के लिए सीएमओ, पीएमओ, डिप्टी सिविल सर्जन, एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) और डीएमएस (डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) के कुल 33 पद स्वीकृत हैं।

17 पद हैं खाली

इनमें से वर्तमान में 16 पदों पर ही नियमित अधिकारी तैनात हैं, जबकि 17 पद खाली हैं। सबसे ज्यादा मार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और अनुमंडलीय अस्पतालों की रीढ़ माने जाने वाले एसएमओ कैडर पर पड़ी है।

जिले में एसएमओ के 21 स्वीकृत पदों में से मात्र 10 अधिकारी ही कार्यरत हैं और 11 पद खाली पड़े हैं। यही हाल जिला मुख्यालय का है, जहां डिप्टी सिविल सर्जन के कुल आठ पदों में से तीन पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से भर्ती प्रकिया चल रही है, जिसके तहत जिले में डॉक्टर ज्वाइन कर रहे हैं।

फाइलों और ओपीडी के बीच पिस रहे मेडिकल ऑफिसर

एसएमओ के पद रिक्त होने का सीधा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। विभागीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) व सीएचसी में तैनात मेडिकल ऑफिसर (एमओ) को ही एसएमओ का अतिरिक्त प्रभार थमा दिया गया है।

जिसके चलते वे सरकारी योजनाओं व फाइलों में उलझे रहते हैं और इलाज प्रकिया प्रभावित रहती है। डॉक्टर ओपीडी में बैठकर मरीजों के इलाज करने या प्रशासनिक फाइलों, बैठकों और रिपोर्टिंग में उलझे रहते हैं। डॉक्टर से प्रशासनिक काम लेने के कारण अस्पतालों में मरीजों के लिए डॉक्टर की कमी और ज्यादा गंभीर हो जाती है।

निगरानी ठप, योजनाओं की रफ्तार पर ब्रेक

अधिकारियों की कमी का सीधा असर विभागीय कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ड्यूटी तय करने व निगरानी में दिक्कत आ रही है।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, टीबी नियंत्रण और आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं की जमीनी समीक्षा प्रभावित हो रही है।

जिले के 47 स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी, पीएचसी व सब-सेंटर) में औचक निरीक्षण लगभग बंद सा हो गया है, जिससे अनुपस्थिति और अव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग में एसएमओ और डिप्टी सिविल सर्जन के पदों की कमी की जानकारी उच्च अधिकारियों और मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। सभी 47 स्वास्थ्य संस्थाओं में स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों को सुचारू रूप से चलाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। चल रही भर्ती प्रक्रिया मेंं प्रदेश में 400 चिकित्सकों ने ज्वाइन किया है। जिसमें से सोनीपत में भी चिकित्सक ज्वाइन हो रहे हैं।
-डॉ. अलंकृता गेरा, सिविल सर्जन, सोनीपत