अमित कौशिक, सोनीपत

शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी राजकीय कन्या विद्यालयों में केवल महिला अध्यापकों की नियुक्ति का फैसला ले सकता है। इस संबंध में विभागीय उच्चाधिकारी विचार कर रहे हैं, जिस पर जल्द ही मुहर लग सकती है।

खरखौदा के सरकारी स्कूल में छात्राओं के यौन शोषण का मामला दैनिक जागरण में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है और इस तरह की घटना भविष्य में न हो, इसके लिए कई जरूरी कदम उठाने के लिए प्रयासरत है। अगर यह विचार सिरे चढ़ा तो प्रदेश के सभी राजकीय कन्या विद्यालयों में पुरुष अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हो सकेगी। इससे शिक्षा के मंदिरों में यौन शोषण जैसे कुकृत्यों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। इस संबंध में राज्य महिला आयोग की ओर से भी शिक्षा विभाग को सिफारिश की जाएगी कि कन्या विद्यालयों में केवल महिला अध्यापकों की ही नियुक्ति की जाए। जिस स्कूल में छात्राओं के यौन शोषण का मामला सामने आया है, वहां की छात्राओं ने भी मांग की है कि उनके स्कूल से सभी पुरुष अध्यापकों को हटाकर केवल महिला अध्यापकों को ही नियुक्त किया जाए। महिला कॉलेजों में पहले से लागू है नियम

प्रदेश के महिला कॉलेजों में इस तरह का नियम पहले से ही लागू है। सोनीपत के महिला कॉलेज में डिप्टी सुपरिटेंडेंट रोहतास बाल्याण ने बताया कि प्रदेश के महिला कॉलेजों में 50 वर्ष से कम उम्र के पुरुष अध्यापकों को नियुक्त नहीं करने का नियम है। हालांकि स्टाफ की कमी व अन्य कारणों से अधिकतर कॉलेजों में 50 साल से कम उम्र के पुरुष अध्यापक नियुक्त हैं।

शिक्षा के मंदिर में छात्राओं का उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त करने लायक नहीं है। अगर संभव हो सके तो कन्या विद्यालयों में केवल महिला अध्यापकों की ही नियुक्ति होनी चाहिए। इस तरह का मामला सामने आने के बाद विभाग यह बड़ा फैसला ले सकता है। आयोग की ओर से इस संबंध में शिक्षा विभाग को सिफारिश की जाएगी।

- प्रतिभा सुमन, अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग

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