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सावधान! न आया OTP न किया लिंक पर क्लिक, फिर भी बैंक खाते से उड़े लाखों रुपये; जानें साइबर ठगी का नया पैंतरा

Published: Wed, 30 Sep 2026 08:09 PM (IST)

साइबर अपराधी अब ओटीपी साझा किए बिना भी लाखों की ठगी कर रहे हैं, जैसा कि सोनीपत में दो मामलों ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सोनीपत में ओटीपी साझा किए बिना लाखों रुपये की साइबर ठगी।

  2. साइबर अपराधी फर्जी दस्तावेजों पर खुले खातों का उपयोग कर रहे हैं।

  3. केवल ओटीपी नहीं, बैंकिंग सुरक्षा के अन्य उपाय भी अपनाएं।

जागरण संवाददाता, सोनीपत। साइबर ठगी से बचने के लिए सिर्फ ओटीपी को गोपनीय रखना ही पर्याप्त नहीं है। साइबर अपराधी अब ठगी के ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिनमें पीड़ितों के अनुसार न उन्होंने कोई ओटीपी साझा किया, न किसी अनजान लिंक पर क्लिक किया और न ही बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी को दी।

इसके बावजूद उनके खातों से लाखों रुपये निकल गए। सोनीपत में एक सप्ताह के भीतर सामने आए दो मामलों में एक पीड़ित के खाते से 2.78 लाख और मां-बेटे के खातों से 1.59 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए है।

केस हिस्ट्री-1

तीन दिन में तीन बार निकले 2.78 लाख

सुशील कुमार ने पुलिस को बताया कि उसके बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन हुए। तीनों ट्रांजेक्शन फोन पे के माध्यम से किए गए। पहली बार 93,100 रुपये, दूसरी बार 92,100 रुपये और तीसरी बार 93,120 रुपये खाते से निकल गए। इस तरह तीन दिन में कुल 2,78,320 रुपये खाते से ट्रांसफर हो गए। उसने किसी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं किया था।

उसने किसी व्यक्ति के साथ बैंक खाता, एटीएम, यूपीआइ या अन्य गोपनीय जानकारी भी साझा नहीं की। उसका कहना है कि इन ट्रांजेक्शन के संबंध में उसे कोई ओटीपी या किसी तरह की पुष्टि प्राप्त नहीं हुई। जांच में सामने आया कि राशि ऐसे खातों में भेजी गई, जिनके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए थे।

केस हिस्ट्री-2

मां-बेटा, खाते से निकल गए 1.59 लाख

मयूर विहार की रहने वाली बिमला देवी के अनुसार इस समय के आसपास उनके बैंक खाते से रुपये निकलने शुरू हुए। इसके बाद उनके बेटे के बैंक खाते से भी राशि डेबिट हुई। जिस समय ट्रांजेक्शन हो रहे थे, उस समय मां-बेटा दोनों खेत में काम कर रहे थे और मोबाइल फोन उनके पास ही थे। जब दोनों ने अपने बैंक खाते चेक किए तो रकम निकलने का पता चला।

बिमला देवी के अनुसार उन्होंने किसी व्यक्ति को ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी कोई गोपनीय जानकारी नहीं दी। ट्रांजेक्शन के दौरान मोबाइल पर कोई ओटीपी भी नहीं आया। बैंक की ओर से भी लेनदेन संबंधी एसएमएस मिला। दोनों खातों से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1,59,498.88 रुपये निकल लिए गए।

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • बैंक खाते में अचानक कोई अनजान ट्रांजेक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें।
  • बैंकिंग एप, यूपीआइ और ई-मेल के पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें।
  • अनजान एप, वेबसाइट या लिंक पर बैंक संबंधी जानकारी दर्ज न करें।
  • मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप अनजान व्यक्ति के कहने पर इंस्टाल न करें।
  • खाते से हुए लेनदेन की जानकारी बैंक स्टेटमेंट से जांचते रहें।
  • इंटरनेट मीडिया पर अपनी निजी जानकारियां शेयर न करें
  • गूगल प्ले स्टोर और एप्पल एप स्टोर जैसे भरोसेमंद प्लेटफार्म से ही एप डाउनलोड कर

साइबर सुरक्षा में सिर्फ ओटीपी की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। मोबाइल, सिम, यूपीआइ, बैंकिंग एप और ई-मेल की सुरक्षा भी जरूरी है। किसी खाते से अनधिकृत लेनदेन होने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
-नवदीप सिंह, साइबर एक्सपर्ट, थाना साइबर