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खुले में रेत-बजरी के ढेर, बिना ढके निर्माण, शहर की हवा में घुल रही धूल

Published: Wed, 23 Sep 2026 06:02 PM (IST)

सोनीपत में खुले में पड़ी निर्माण सामग्री और बिना ढके निर्माण स्थलों के कारण वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच ...और पढ़ें

खुले में पड़ी रेत बजरी

खुले में पड़ी रेत बजरी

जागरण संवाददाता, सोनीपत। सोनीपत में बिल्डिंग मेटेरियल सप्लायर प्रदूषण नियंत्रण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कई स्थानों पर बिल्डिंग मेटेरियल सप्लायर रेत, बजरी और अन्य निर्माण सामग्री सड़क किनारे खुले में रख रहे है।

दूसरी ओर रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों में भी निर्माण स्थल को पूरी तरह ढकने और धूल रोकने के इंतजाम नजर नहीं आ रहे। निर्मााणधीन स्थलों और सड़क किनारे पड़ी निर्माण सामग्री हवा चलने या वाहनों के गुजरने के साथ ही इन स्थानों से धूल उड़कर आसपास के क्षेत्र में फैल रही है। ये धूल कण प्रदूषण के अहम कारक है, जिससे शहर की हवा खराब हो रही है।

शहर में प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती केवल निर्माणाधीन भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क किनारे खुले में निर्माण सामग्री रखने वाले बिल्डिंग मेटेरियल सप्लायर भी इसका हिस्सा हैं। कई जगह सामग्री को सड़क के किनारे ही डाल दिया जाता है।

जिम्मेदार बने लापरवाह

इसके बाद ट्रैक्टर-ट्राली या अन्य वाहनों में रेत-बजरी की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान भी धूल हवा में फैलती है। खास तौर पर सड़क किनारे सामग्री होने से वाहनों के आवागमन के दौरान पहियों से भी धूल दोबारा हवा में उठती है। ऐसे में एक ही स्थान से बार-बार धूल उड़ रही है, जिससे आसपास का वातावरण प्रदूषित हो रहा है।

वहीं, प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जिम्मेदार भी लापरवाह बने हुए हैं। नगर निगम अधिकारी केवल ग्रैप के नियम लागू होने के बाद ही जागते है। इसमें भी एक दो जगह कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली जाती है। आने वाले दिनों में शहर में प्रदूषण को लेकर स्थिति खराब हो सकती है। पहले भी शहर प्रदूषण के मामले में देशभर में शीर्ष पर रह चुका है।

कार्रवाई भी हुई, फिर भी समस्या बरकरार

खुले में निर्माण सामग्री डालने, बिना ढके निर्माण करने और प्रदूषण फैलाने वाली अन्य गतिविधियों पर रोक के लिए कार्रवाई का प्रविधान है। बावजूद समस्या बरकार है। नगर निगम ने दिसंबर, 2025 में प्रदूषण फैला रहे 16 भवन निर्माण करने वालों पर 3.80 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था, लेकिन यह कार्रवाई ग्रैप के नियम लागू होने के बाद ही होती है। आम दिनों में इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिसके चलते बिना रोकटोक प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधि जारी रहती है।

इस साल भी प्रदूषण के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

जिले में वायु प्रदूषण की स्थिति 2026 में भी कई बार गंभीर रही है। सर्दियों में स्माग और अन्य कारणों की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही है, लेकिन मानसून के दौरान भी धूल और धुंए से वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव बना रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक एक जुलाई, 2026 को एक्यूआइ 276 दर्ज किया गया था।

उस दिन सोनीपत देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर दर्ज हुआ था। इससे एक दिन पहले भी शहर का प्रदूषण स्तर 215 एक्यूआइ तक पहुंचा था। वहीं, 18 जुलाई को सोनीपत का एक्यूआइ 258 दर्ज किया गया था।

हवा में उड़ती धूल का असर आंखों और सांस पर

प्रदूषण के स्तर का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हवा की खराब गुणवत्ता से सांस और दमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। साथ ही नेत्र रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। नागरिक और निजी अस्पतालों में रोजाना ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषण की वजह से सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश, आंखों में जलन और खांसी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।

नंबर गेम

  • 100 से अधिक स्थानों पर खुले में पड़ी है निर्माण सामग्री
  • 50 से अधिक रिहायशी क्षेत्रों में बिना कवर किए चल रहे निर्माण कार्य
  • 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रविधान है खुले में निर्माण सामग्री डालने पर
  • 276 एक्यूआइ दर्ज हुआ था इस साल एक जुलाई को


खुले में निर्माण सामग्री डालने वालों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। वहीं, भवन निर्माण करने वालों को भी ढक कर निर्माण करने के लिए कहा जाता है। नियम के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाती है। ग्रैप लागू होने पर पूरी तरह से भी गतिविधिया बंद करवा दी जाती है।
- वीरेंद्र सिंह, बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर निगम।