डीपी आर्य, सोनीपत

जिले की एकमात्र कोरोना संक्रमित छात्रा तमन्ना जैन अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। खानपुर मेडिकल कॉलेज से आने के बाद उन्होंने खुद को होम क्वारंटाइन कर लिया है। उन्होंने अपने अस्पताल के अनुभव साझा करते हुए बताया कि चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार बिल्कुल घर जैसा है और सुविधाएं किसी होटल जैसी। पौष्टिक खाना और स्वच्छता अव्वल दर्जे की हैं। कोरोना के संदिग्ध या संक्रमित लोगों को डरकर भागने की जरूरत नहीं है, आराम से जांच और उपचार कराएं। जल्दी स्वस्थ तो होंगे ही, सरकारी अस्पतालों के बारे में बनी धारणा भी बदल जाएगी।

तमन्ना जैन ने बताया कि वह अस्पताल में लगातार 14 दिन रही। घर-परिवार व परिचितों से अलग रहकर तनाव व परेशान हो सकती थी, लेकिन चिकित्सकों के साथ ही नर्स व स्वीपर तक का भरपूर सहयोग मिला। मैंने अस्पताल से भी परिजनों को मैसेज किया था कि सभी क्वारंटाइन रहें, अस्पताल में मुझको कोई परेशानी नहीं है। व्यस्तता होने के बावजूद चिकित्सक काफी देर तक बैठकर बातचीत करते थे। घर जैसा खाना मिलता है, जो खाने की इच्छा होती थी उसी हिसाब से भोजन देते थे।

यही कारण रहा कि मैं स्वस्थ होकर आ सकी हूं। यदि तनाव में रहती या उपचार में जरा सी लापरवाही हो जाती तो स्वस्थ होने में ज्यादा समय लगता। तमन्ना जैन ने कहा कि बीमारी को खौफ न बनाएं, इसकी दवा भले ही न बनी हो, लेकिन हमारे चिकित्सकों के पास उपचार है। वह अपने व्यवहार से ऐसी प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं कि मरीज ठीक होता चला जाता है। आपको इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प व हिम्मत से काम लेना है, भावनाओं में नहीं बहना है।

जो लोग अभी भी लॉकडाउन में घूम रहे हैं, उनके कारण यह बीमारी फैल सकती है। क्वारंटाइन करना ही एकमात्र तरीका है। मैंने विदेश से आते ही खुद को क्वारंटाइन किया था। अगले दिन टेस्ट करवाने गई थी, मेरी इस समझदारी से चिकित्सक बहुत प्रभावित हुए और कहा उन्हें तुम जैसे बच्चों पर गर्व है।

Posted By: Jagran

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