जागरण संवाददाता, सोनीपत : अधिवक्ताओं के 19 दिन के कार्य बहिष्कार से अदालतों में काम-काज बंद पड़ा है। सबसे ज्यादा प्रभावित वह आरोपित हो रहे हैं, जिनकी जमानत होनी थी। कार्य बहिष्कार के चलते उनके जमानती आवेदनों पर विचार ही नहीं हो पा रहा है। इससे जेल में बंदियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कार्य बहिष्कार के दौरान ही जेल में 300 अतिरिक्त बंदी हो गए हैं। अब जेल में 745 बंदियों की जगह 1186 बंदी हो गए हैं। इसके चलते जेल में अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।

विभिन्न अदालतों से रोजाना 20-22 बंदियों की जमानत होती है। लगभग इतने ही विचाराधीन बंदी रोजाना जेल जाते भी हैं। जेल में एक सप्ताह में आरोपितों के जेल जाने और जमानत पर आने का औसत लगभग समान बैठता है। अधिवक्ताओं की हड़ताल से जेल से बंदियों का छूटना बंद हो गया है। इससे जेल में बंदियों की संख्या बढ़ती जा रही है। कार्य बहिष्कार के इन 19 दिनों में जेल करीब 300 बंदी ज्यादा हो गए हैं। इस समय जेल में 1186 बंदी हैं, जबकि जेल की क्षमता 745 बंदियों की ही है। जेल में बंदियों की संख्या के हिसाब से चाय, नाश्ते और भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। जेल में बंद कई आरोपित ऐसे हैं, जो मामूली धाराओं में बंद हैं, इनको अधिवक्ताओं का कार्य बहिष्कार खत्म होते ही जमानत मिल जाएगी। जेल में बंद आरोपितों के स्वजन रोजाना अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। उम्मीद है दो तीन दिन में अधिवक्ताओं कार्य बहिष्कार खत्म हो जाने के बाद जेल से 300 बंदियों को अदालत में पेश किया जा सकेगा। अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार से जेल में बंदियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जेल में 745 के सापेक्ष 1186 बंदी हैं। पिछले 19 दिनों में ही करीब 300 बंदी जेल में बढ़ गए हैं। पहले जहां रोजाना 15-20 बंदियों को जमानत के लिए अदालत में पेश किया जाता था, अब रोजाना दो-तीन बंदी ही कोर्ट जा रहे हैं। हमने बंदियों की संख्या बढ़ने के आधार पर ही जरूरी व्यवस्थाओं को बढ़ा लिया है।

-रामचंद्र सिंह, जेल उपाधीक्षक, सोनीपत

Posted By: Jagran

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