डीपी आर्य, सोनीपत

अब सर्दियों में पानी ठंडा हो जाने पर मछलियों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। मत्स्य विभाग ने बंग्लादेश की तर्ज पर मछली पालन कराने की योजना तैयार की है। हैदराबाद में पिछले साल इसका प्रयोग सफल रहा था। जिले के जाहरी में भी एक प्लांट तैयार कर इसका सफल परीक्षण किया गया है। इसमें पानी की बचत होगी। मछलियों को आरओ से साफ किए पानी में पाला जाएगा। पानी का तापमान सामान्य रखने को भी सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे मछलियां पूरे साल बढ़ती रहेंगी और उनका तीन गुना तक उत्पादन होगा।

सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन व मछली पालन को बढ़ावा देने की योजना लागू की हैं। अब किसानों को काल्पनिक तालाबों में मछली पालन कराया जाएगा। ईंटों से पक्के बनवाए गए बड़े-कड़े टैंकों में कैटला, मरीगल व रोहू आदि आईएमसी (इंडियन मेजर कार्प) को पाला जाएगा। ये आठ-दस टैंक बने होंगे। इनके पानी को बायोफ्लाप तकनीक की तरह तीसरे दिन बदलना नहीं पड़ेगा।

टैंकों में मछलियों के रहने से पानी गंदा हो जाता है। इसको साफ करने के लिए एक आरओ सिस्टम लगाया जाएगा। इससे पानी साफ होने के साथ ही उसमें आक्सीजन मिलाई जाएगी। इससे आक्सीजन की कमी से मछलियों का विकास रुकने की समस्या नहीं होगी।

सर्दियों में पानी ठंडा हो जाता है। इसके चलते मछलियों का विकास और प्रजनन रुक जाते हैं। यही कारण है कि सामान्यतया: नदियों-तालाबों का पानी ठंडा होने के चलते मछलियों का उत्पादन बंद हो जाता है। जबकि नई तकनीक में टैंकों का पानी भयंकर सर्दी होने पर भी सामान्य तापमान पर रहेगा। इसके लिए एक हीटर यूनिट का निर्माण कराया जा रहा है। इससे मछलियों का विकास तेजी से होने के साथ ही वह पूरे साल पैदावार देती रहेंगी। ऐसे में सामान्य की अपेक्षा तीन गुना तक उत्पादन लिया जा सकेगा। जिले में आठ हजार एमटी मछली का उत्पादन होता है। अब इसके लिए किसानों को नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से ऋण भी दिलाया जा रहा है। नई बंग्लादेश तकनीक हैदराबाद के बाद अब सोनीपत में प्रचलन में लाई जा रही है। इसकी एक यूनिट जहारी के पास लगाई जा चुकी है। नई तकनीक में मछलियों को स्वच्छ पानी में एक समान तापमान पर रखा जाएगा, जिससे वह भयंकर सर्दी में भी सामान्य रहेंगी और बंपर उत्पादन देंगी।

- योगेश शर्मा, प्रभारी जिला मत्स्य अधिकारी

Posted By: Jagran

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