सोनीपत, जागरण संवाददाता: दुष्कर्म व शोषण की शिकार बच्चियों-किशोरियों को व्यवस्था की लापरवाही का दंश झेलना पड़ रहा है। चिकित्सकों की हठधर्मिता से बच्चियों को दो-दो सप्ताह तक रोहतक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे महिला थाना पुलिस का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। पुलिस के रिपोर्ट प्रस्तुत करने और साक्ष्यों के लिए उपलब्ध गाइडलाइन का हवाला देने के बावजूद महिला चिकित्सक सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कई बच्चियों के स्वजन ने अपनी शिकायत वापस लेने की बात कहते हुए पुलिस के बुलाने पर आना ही बंद कर दिया है।

दुष्कर्म पीड़ित बच्चीयों को किया जा रहा परेशान 

सुप्रीम कोर्ट और शासन कई बार न्यय प्रक्रिया को सुगम और त्वरित बनाने के आदेश-निर्देश जारी कर चुके हैं। इसके साथ ही दुष्कर्म और छेड़छाड़ की शिकार बच्चियों-किशोरियों को ज्यादा परेशान न किया जाए। पूछताछ भी इस तरह की जाए, जिससे उनको मानसिक दबाव का शिकार न होना पड़े। इसके बावजूद बच्चियों और उनके स्वजन को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनको पुलिस थानों से अस्पताल तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या बच्चियों की आयु का निर्धारण करने में आ रही है। इसको लेकर पुलिस और महिला चिकित्सक एकमत नहीं हैं। पुलिस जहां बच्चों के स्कूल प्रमाण पत्र और आधार कार्ड को आयु सत्यापन का आधार मान लेती है, वहीं महिला चिकित्सक प्रत्येक मामले में एक्सरे लिख रही हैं। दुष्कर्म के अलावा सामान्य छेड़छाड़ व उत्पीड़न के मामलों में भी एक्सरे लिखे जा रहे हैं।

बच्चियों को ले जाना पड़ता है रोहतक

जिला अस्पताल में बच्चियों के आयु निर्धारण के एक्सरे नहीं किए जा रहे हैं। इसके लिए उनको रोहतक जाना पड़ता है। कई बार रोहतक में भी एक दिन में एक्सरे नहीं हो पाता है। इसके चलते दो-चार दिन बाद दोबारा से एक्सरे कराने ले जाना पड़ता है। कभी पुलिस का व्यस्त हो जाना और कभी चिकित्सक का नहीं मिलना बच्चियों के स्वजन को परेशान किए रखता है।

हमको नहीं करनी है शिकायत 

पिछले दिनों देवड़ू रोड पर एक बच्ची के साथ छेड़छाड़ हुई थी। उसके स्वजन ने महिला थाना में रिपोर्ट दर्ज करा दी। चिकित्सकीय परीक्षण के लिए बच्ची को भेजने के साथ ही उसके स्कूल का प्रमाण पत्र और आधार कार्ड लगाया गया। महिला चिकित्सक ने इन कागजात को स्वीकारने से इनकार कर दिया और एक्सरे कराने के लिए रोहतक भेज दिया। घटना के 12 दिन बाद भी बच्ची का एक्सरे नहीं हो पाया है। परिवार के लोग बच्ची को लेकर पुलिस के साथ तीन बार रोहतक जा चुके हैं। वहीं पांच-छह बार महिला थाने में आ चुके हैं। परेशान होकर अब उन्होंने पुलिस के बुलाने पर आने से ही इंकार कर दिया है। वह रोजाना बच्ची का तमाशा बनाने से नाराज हैं और कार्रवाई नहीं चाहते।

Sonipat News: पत्नी व ससुर करते थे प्रताड़ित, पति ने की आत्महत्या, पुलिस ने किया मामला दर्ज

Sonipat: एटीएम की तर्ज पर काम करेंगी मशीन, सिक्का डालने पर बाहर निकलेगा थैला; प्लास्टिक से मिलेगा छुटकारा

Edited By: Nidhi Vinodiya

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट