सोनीपत, जागरण संवाददाता। हरियाणा के इकलौते खेल स्कूल में चेचक जैसी महामारी फैल गई है। पांच कक्षाओं के 50 से अधिक बच्चों के चपेट में आने के बाद स्कूल प्रशासन जागा और पांच कक्षाओं के बच्चों की छुट्टी कर उन्हें उनके घर भेज दिया गया है, ताकि स्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चे चेचक की चपेट में न आएं।

स्कूल में पहले दो रेजिडेंट डाक्टर तैनात थे लेकिन उनका तबादला होने के बाद अब स्कूल में कोई भी रेजिडेंट डाक्टर नहीं है। खेल विभाग की मांग पर स्वास्थ्य विभाग ने एक महिला डाक्टर की अस्थायी ड्यूटी स्कूल में लगाई है। वह सप्ताह में दो दिन स्कूल जाकर बच्चों को देखती हैं।

प्रदेश के कई जगहों से यहां पढ़ते हैं बच्चे

जीटी रोड पर बीसवां मील स्थित प्रदेश का इकलौता खेल स्कूल मोतीलाल खेलकूद विद्यालय है। इसमें प्रदेश और अन्य स्थानों के एक हजार के करीब बच्चे खेल अभ्यास के साथ ही शिक्षा भी ग्रहण करते हैं। स्कूल में प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई होती है। स्कूल में विभिन्न खेलों के कोच तैनात हैं और विशेष अभ्यास की व्यवस्था भी है।

स्कूल प्रशासन को नहीं था होश

स्कूल में कई दिन से चेचक जैसी महामारी फैल रही थी लेकिन स्कूल प्रशासन की नींद नहीं टूटी। बीमार होने वाले कई बच्चों को सोनीपत के नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए भेजा भी गया लेकिन चेचक कंट्राेल नहीं हुआ।सोमवार शाम तक 50 से अधिक बच्चों को चेचक हो चुका था। इसके बाद स्कूल प्रशासन तुरंत हरकत में आया और पांच कक्षाओं की छुट्टी कर बच्चों को उनके घर भेज दिया गया।

दो दिन पूर्व की थी छुट्टी

स्कूल की चौथी व पांचवीं कक्षाओं की दो दिन पूर्व छुट्टी कर दी गई थी लेकिन चेचक को फैलने से नहीं रोका जा सका। सोमवार को स्कूल प्रबंध ने छठी, सातवीं और आठवीं कक्षाओं के बच्चों की भी छुट्टी कर दी और उनके अभिभावकों को बुलाकर उनके घर भेज दिया गया। इन पांच कक्षाओं में छह से अधिक बच्चे पढ़ते हैं।

अब स्कूल में नौवीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं के ही बच्चे मौजूद हैं। अगर चेचक का फैलना बंद नहीं हुआ तो इन कक्षाओं की भी छुट्टी की जाएगी। स्कूल की प्राइमरी विंग कमला नेहरू स्कूल के बच्चे भी चेचक की चपेट में आए हुए हैं।

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स्कूल में कोई रेजिडेंट डाक्टर नहीं

मोतीलाल नेहरू खेल स्कूल में पहले एक पुरुष व एक महिला रेजिडेंट डाक्टर की ड्यूटी रहती थी। किसी भी बच्चे के बीमार होने पर डाक्टर तुरंत बच्चे का इलाज करते थे लेकिन दोनाें डाक्टरों का तबादला हो गया। इसके बाद बच्चों के बीमार होने पर उन्हें सोनीपत के नागरिक अस्पताल ले जाया जाता था। बाद में एक महिला डाक्टर की ड्यूटी अस्थायी रूप से स्कूल में लगाई गई। वही बढ़खालसा सीएचसी से तीन दिन स्कूल जाकर बच्चों का इलाज करती थी लेकिन रात में स्कूल में कोई डाक्टर नहीं रहता।

हरियाणा व स्कूल के कार्यकारी प्रिंसिपल खेल निदेशक पंकज नैन ने बताया कि स्कूल में चेचक फैलने पर पांच कक्षाओं के बच्चों की छुट्टी कर उन्हें उनके घरों में आइसोलेट किया गया है। स्कूल प्रशासन ने दूसरे बच्चों को चेचक से बचाने के लिए यह कदम उठाया है। खेल विभाग ने स्कूल में स्थायी रेजिडेंट डाक्टर की मांग स्वास्थ्य विभाग से की लेकिन कामचलाऊ प्रबंध कर दिया गया। हम मामले पर नजर रखे हुए हैं।

Edited By: Geetarjun

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