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₹10 में लग्जरी सफर! हाइड्रोजन ट्रेन में मेट्रो जैसी सुविधाएं, वंदे भारत जैसी सेफ्टी; ₹25 में पहुंचें सोनीपत

Published: Fri, 17 Jul 2026 08:56 PM (IST)

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सोनीपत-जींद रूट पर शुरू हो गई है। यह ट्रेन 75 किमी/घंटा की अधिकतम गति से ...और पढ़ें

इसकी सीटें आरामदायक हैं और दरवाजे ऑटो लाॅक के साथ मौजूद हैं।

इसकी सीटें आरामदायक हैं और दरवाजे ऑटो लाॅक के साथ मौजूद हैं।

HighLights

  1. सामान्य किराए में मेट्रो जैसी सुविधाएं, वंदे भारत जैसी सुरक्षा।

  2. सोनीपत-जींद रूट पर 75 किमी/घंटा की अधिकतम गति।

  3. 15 लीकेज सेंसर, सीसीटीवी, आपातकालीन संचार प्रणाली मौजूद।

नंदकिशोर भारद्वाज, सोनीपत। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ट्रैक पर उतर चुकी है। यात्री सामान्य ट्रेन के किराये में लग्जरी सुविधाओं से युक्त सफर का आनंद ले सकेंगे।

जींद की ओर से चलकर पहले दो स्टेशनों के लिए पांच और सोनीपत से गोहाना की ओर दो स्टेशनों के लिए यात्रियों को मात्र 10 रुपये देने होंगे, जबकि जींद से सोनीपत तक का सफर 25 रुपये में किया जा सकेगा।

ट्रेन में मेट्रो की तर्ज पर स्टेशन डिस्प्ले, अनाउंसमेंट सिस्टम, सीसीटीवी और वंदे भारत की तर्ज पर एमरजेंसी में चेन पूलिंग के यम ड्राइवर के साथ बात काने का सिस्टम मौजूद है। इसकी सीटें आरामदायक हैं और दरवाजे ऑटो लाॅक के साथ मौजूद हैं।

अधिकतम स्पीड 75 किलोमीटर प्रतिघंटा

जींद-गोहाना-सोनीपत के बीच चलाई गई हाइड्रोजन ट्रेन के दोनों ओर दो इंजन माैजूद हैं। इनमें से प्रत्येक में 210 किलो हाइड्रोजन गैस मौजूद रहेगी। इसमें बैट्री पैक भी मौजूद रहेगा, खराबी आने या गैस खत्म होने की अवस्था इसे बैट्री के सहारे 60 किलोमीटर तक हाइड्रोजन प्लांट तक ले जाया जा सकता है। ट्रैक की क्षमता के अनुसार इस रूट पर इसकी अधिकतम स्पीड 75 किलोमीटर प्रतिघंटा से चलाया जा सकता है।

कंट्रोल रूम लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर के पास

ट्रेनसेट टीम के इंजीनियर भूषण शर्मा ने बताया कि आपात स्थिति या युद्ध के दौरान तेल या बिजली न होने की सूरत में इसे किसी भी ट्रैक पर ले जाया जा सकता है। कोच में मेट्रो की तर्ज पर डिस्पले पर आने वाले स्टेशन का नाम प्रदर्शित होगा और स्टेशन आने से पहले अनाउंसमेंट होगी। इसके साथ यात्रियों की सुविधा के लिए हर कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनका कंट्रोल रूम लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर के पास होगा।

15 लीकेज सेंसर के साथ और भी बहुत कुछ

ट्रेन में तीन-तीन यात्रियों के आमने-सामने बैठने और खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह दी गई है। पूरी ट्रेने में हवा के लिए पंखे दिए गए हैं। ट्रेन संचालन के लिए लोक पायलट व सह लोको पायलट और ट्रेन के पिछले हिस्से में ट्रेन मैनेजर मौजूद रहेंगे।

भूषण शर्मा ने बताया कि ट्रेन के इंजन को हाईटेक और पावरफुल बनाया गया है। इसमें हर स्थिति का पता करने के लिए हाईटेक सेंसर लगाए हैं। हाइड्रोजन लीकेज की समय से चेतावनी के लिए अलग-अलग हिस्सों में 15 लीकेज सेंसर, तापमान की अधिकता बताने के लिए सात हीट डिटेक्ट सेंसर भी लगाए गए हैं। पूरी ट्रेन नाॅन एसी है।

दरवाजों में लगाया गया है ऑटो लाॅक

ट्रेन के दरवाजों मेंं ऑटो लाॅक लगाया गया है। दरवाजे को अंदर या बाहर से खोलने के बाद यह लाॅक हो जाता है, लाॅक खोले बिना इसे दोबारा बंद नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि चलती हुई ट्रेन में दरवाजे इधर-उधर न टकराएं। सामान्य ट्रेन से अलग इसमें हर कोच में चार-चार स्लाइडिंग डोर लगाए लगाए गए हैं। हर दरवाजे में दो हिस्सों में स्लाइडिंग डोर है। दरवाजे के बीच में यात्रियों चढ़ने व उतरते समय सहारा देने लिए एक लोहे की राड लगाई गई है। इसी राड के जरिये यात्रियों को ट्रेन में भारी वस्तुएं ले जाने से रोक गया है।

आपात स्थिति में लोको पायलट से करें बात

हाइड्रोजन ट्रेन में आपात स्थिति में लोको पायलट से बात करने के हर कोच में सिस्टम लगाया गया है। इसमें एक बटन दबाकर लोको पायलट को स्थिति से अवगत कराया जा सकता है। वहीं वंदे भारत की तर्ज पर इसी सिस्टम को चेन पूलिंग के समय ड्राइवर से बात करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। सिस्टम के पास ही इसे इस्तेमाल करने के लिए निर्देश लिखे गए हैं।

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