यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 26, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
महिला विवि में डिप्लोमा इन कंप्यूटर इंजीनियरिग फिर शुरू करने की मंजूरी
गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस महिला विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में दो अहम निर्णय लिए गए। परिषद की ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, गोहाना: गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस महिला विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में दो अहम निर्णय लिए गए। परिषद की बैठक में अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के पालीटेक्निक कालेज में बंद हो चुके डिप्लोमा इन इंजीनियरिग को फिर से शुरू करने की मंजूरी दे दी। बेटी बचाओ-पढ़ाओ अभियान को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर यह निर्णय लिया गया गया। विश्वविद्यालय के योग्य अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर को सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार वेतन मिलेगा। बीपीएस महिला विश्वविद्यालय के पालीटेक्निक कालेज में कई कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम (एसएफएस) के तहत चल रहे थे। फीस अधिक होने और छात्राओं के दाखिले कम होने पर 2015 में यहां आइटी डिप्लोमा बंद किया गया। कुछ साल पहले यहां डिप्लोमा इन इंजीनियरिग को बंद कर दिया गया। इस पर क्षेत्र के आसपास के गांव की पंचायतों के प्रतिनिधियों ने एतराज जताया।
प्रतिनिधियों ने इस संबंध में प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को ध्यान में रखकर फिर से डिप्लोमा इन इंजीनियरिग शुरू करने की मांग की गई। शिक्षामंत्री के हस्तक्षेप के बाद महिला विश्वविद्यालय के प्रशासन ने कार्यकारी परिषद की बैठक में डिप्लोमा इन इंजीनियरिग को फिर से शुरू करने की मंजूरी दी गई। यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया।
डिप्लोमा इन इंजीनियरिग में दाखिला प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। कार्यकारी परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार 57700 रुपये वेतन देने को भी हरी झंडी दी गई जबकि अब तक वेतन 25 हजार रुपये दिया जा रहा है। दोनों अहम निर्णयों से पालीटेक्निक कालेज के स्टाफ और अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर खुश हैं।
विश्वविद्यालय के पालीटेक्निक कालेज में छात्राएं डिप्लोमा इन कंप्यूटर इंजीनियरिग कर सकेंगी। कार्यकारी परिषद की बैठक में डिप्लोमा को दोबारा शुरू करने की मंजूरी दे दी गई है। विश्वविद्यालय ग्रामीण में है और छात्राओं के हित को ध्यान में रख कर यह निर्णय लिया गया।
डा. नीलम मलिक, कुलसचिव, बीपीएस महिला विश्वविद्यालय
