संवाद सहयोगी, कालांवाली : सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में रविवार को मजदूरों की बैठक अनाज मंडी की किसान कैंटीन में हुई। बैठक में तीनों कानून को वापस लेने की मांग की। मजदूर यूनियन के प्रधान मुकेश कुमार ने कहा कि कृषि कानून ने मजदूर वर्ग को बेरोजगार कर दिया है। एक तरफ सरकार युवाओं को रोजगार देने की बात कर रही है वहीं दूसरी तरफ मजदूरों से रोजगार छीन रही है। उन्होंने कहा कि इस कानून से चाहे किसान को एमएसपी के रेट मिल जाए परंतु इस धंधे से जुड़े लाखों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर को मजदूरों का अनाज मंडी में धरना चल रहा था तो मार्केट कमेटी के सचिव मेजर सिंह ने मजदूरों का आश्वासन दिया था कि सरकारी खरीद एजेंसी सीसीआई द्वारा खरीदे जा रहे नरमा की फसल को उतारने का कार्य मजदूरों से करवाने का प्रयास किया जाएगा, परंतु आश्वासन के एक सप्ताह बाद भी मजदूरों को काम नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस समय अतिरिक्त अनाज मंडी में नरमा की आवक जोरों पर है अगर आवक ऐसे ही जारी रही तो उनका सीजन तो खराब हो जाएगा। मजदूर नेता सुखदेव डाबला ने कहा कि अधिकतर मजदूरों ने आढ़तियों से कर्ज ले रखा है जिस कारण वे आढ़तियों के बंधक बन कर रह गए है। यदि नरमे का सीजन लग जाता तो वे आढ़तियों का कर्ज उतार देते, परंतु इस तरह वे उनका कर्ज कैसे उतारेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार उनको आढ़तियों के कर्ज से मुक्त करवाए और उनके बच्चों को नौकरी दे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वे अपने संघर्ष को तेज करेंगे।

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