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बेटे से था 5वें जन्मदिन पर आने का था वादा, तिरंगे में लिपटकर लौटा लाल; राजौरी में बलिदान हुए हरियाणा के सुखचैन

Published: Sat, 05 Sep 2026 08:43 AM (IST)

सिरसा के गांव कुत्ताबढ़ के 30 वर्षीय जवान सुखचैन सिंह जम्मू-कश्मीर में बलिदान हो गए। वे अपने 5 वर्षीय बेटे आकाश के जन्मदिन पर घर आने वाले थे।

सिरसा के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले थे सुखचैन (जागरण)

सिरसा के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले थे सुखचैन (जागरण)

HighLights

  1. सिरसा के जवान सुखचैन सिंह जम्मू-कश्मीर में बलिदान हुए।

  2. वे 59 इंजीनियरिंग रेजिमेंट का हिस्सा थे।

  3. बेटे के पांचवें जन्मदिन पर घर आने वाले थे।

जागरण संवाददाता, सिरसा। सिरसा के गांव कुत्ताबढ़ का सपूत 30 वर्षीय सुखचैन सिंह जम्मू कश्मीर में वीरवार को बलिदान हो गया। सुखचैन के बलिदान की सूचना जैसे ही गांव में मिली तो शुक्रवार को पूरी मार्केट बंद रही।

बलिदानी 59 इंजीनियरिंग रेजिमेंट में जवान थे। वह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे। बलिदानी आपरेशन सिंदूर का भी हिस्सा रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि बलिदानी की वजह ड्यूटी के दौरान करंट लगना है। हालांकि अधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई।

जम्मू कश्मीर में खराब मौसम के कारण उनका पार्थिव शरीर देर रात को उनके गांव में लाया गया। शनिवार को अब उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रहे तैनात

बलिदानी सुखचैन सिंह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू कश्मीर के राजौरी में ही तैनात थे। उनके साले ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मैंने काल करके पूछा कि डर नहीं लगता। तब जीजा ने कहा कि मरना तो एक दिन है ही, इसलिए डर किस बात का।

तीन दिन पहले उनकी जीजा से बात हुई थी। तब उन्होंने जल्द ही घर आने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि था बेटे आकाश का पांचवां जन्मदिन है, इसलिए अब छुट्टी लेकर आऊंगा।

हालांकि वे दो महीने पहले ही परिवार से मिलकर गए थे। करीब छह वर्ष पहले उनकी शादी निर्मल कौर से हुई थी। दंपती का पांच वर्ष का बेटा है।

पिता का पांच साल पहले हुआ देहांत

बलिदानी सुखचैन सिंह जब पांच साल के थे तो उनके पिता बलविंदर सिंह का देहांत हो गया था। एक अक्टूबर को बेटे आकाश का पांचवां जन्मदिन है, इसलिए वह छुट्टी लेकर घर आने की तैयारी कर रहा था, मगर अब पांच साल के बेटे आकाश के सिर से पिता का साया उठ गया।