सिरसा नागरिक अस्पताल: 8 महीने, 8 मौतें... प्रसव के दौरान महिलाओं की जान पर भारी पड़ रही बीमारियां
सिरसा जिले में इस वर्ष प्रसव के दौरान आठ महिलाओं की मौत हुई है, जिनमें फेफड़ों के संक्रमण और हृदय ...और पढ़ें

जिला नागरिक अस्पताल सिरसा (फाइल फोटो)
HighLights
इस वर्ष सिरसा में प्रसव के दौरान आठ महिलाओं की मौत
फेफड़ों के संक्रमण, हृदय संबंधी समस्या मुख्य कारण रहे
स्वास्थ्य विभाग मातृ मृत्यु के मामलों की कर रहा समीक्षा
जागरण संवाददाता, सिरसा। जिले में मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा के दौरान प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में इस वर्ष अब तक प्रसव के दौरान आठ महिलाओं की मौत के मामले सामने आए हैं।
इनमें चार मामलों में फेफड़ों के संक्रमण और हृदय संबंधी समस्या को प्रमुख कारण माना गया है। इसके अलावा रक्तचाप बीपी संबंधी जटिलताओं तथा अन्य चिकित्सकीय व तकनीकी कारण भी सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से सितंबर तक जिले में प्रसव के दौरान छह महिलाओं की मौत हुई, जबकि इस अवधि में 6879 लाइव बर्थ दर्ज किए गए। वहीं वर्ष 2025 में जिले में प्रसव के दौरान 21 महिलाओं की मौत के मामले सामने आए थे। इस वर्ष अब तक यह संख्या आठ है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की समीक्षा कर मौत के कारणों और उपचार के दौरान सामने आई परिस्थितियों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को कम किया जा सके।
चार मामलों में हृदय और फेफड़ों की समस्या
उपसिविल सर्जन डा. प्रतीक गोयल के अनुसार मातृ मृत्यु के मामलों की समीक्षा में दो महिलाओं की मौत का कारण हृदय संबंधी समस्या तथा दो मामलों में फेफड़ों से जुड़ी समस्या सामने आई है। फेफड़ों के संक्रमण और हृदय संबंधी जटिलताएं गर्भावस्था के दौरान गंभीर स्थिति पैदा कर सकती हैं। समीक्षा में इन मामलों के चिकित्सकीय रिकार्ड और उपचार के दौरान सामने आई परिस्थितियों का भी अध्ययन किया गया है।
ऐलनाबाद क्षेत्र में सर्वाधिक तीन मौतें
जिले में क्षेत्रवार स्थिति देखें तो मातृ मृत्यु के सर्वाधिक तीन मामले ऐलनाबाद क्षेत्र से सामने आए हैं। इसके बाद रानियां क्षेत्र में दो महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हुई। अन्य मामलों में माधोसिंघाना, नाथूसरी चौपटा से मातृ मृत्यु के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन सभी मामलों की समीक्षा कर कारणों को दर्ज किया जा रहा है।
मातृ मृत्यु रोकने पर स्वास्थ्य विभाग का फोकस
स्वास्थ्य विभाग का मुख्य जोर गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी और गंभीर स्थिति में समय पर रेफरल पर है। सीएमओ डा. पवन कुमार के अनुसार गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप, हृदय, फेफड़ों या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आने पर समय रहते उपचार उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है। मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की समीक्षा का उद्देश्य उपचार व्यवस्था में सामने आई कमियों की पहचान कर उनमें सुधार करना भी है।
