जागरण संवाददाता, सिरसा : एचएसवीपी स्थित चार सेक्टरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कोई भी सुविधा नहीं है। सेक्टर में कई सरकारी दफ्तर और डिस्पेंसरी है। जिसके कारण शहर के अन्य कालोनी वासी भी सेक्टर पहुंचते है। यहां पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा न होने के कारण लोगों को चार से पांच गुणा अधिक किराया अदा करने के बाद ही सेक्टर में पहुंच पाते है। लेकिन वापस जाने के लिए पैदल के इलावा कोई भी विकल्प नहीं है।

एचएसवीपी के सेक्टर 19, 20, 20 पार्ट 1, पार्ट 2, इराग्रुप और ग्लोबल स्पेस है। सेक्टरों की एक तरफ वेदवाला गांव तो दूसरी तरफ बरनाला रोड की हाउसिग बोर्ड कालोनी, तीसरी तरफ हिसार रोड और चौथी तरफ पुलिस लाइन लगती है। सेक्टर वासियों के पास खुद के साधन होने के बाद भी अगर कोई जरूरत पड़े तो पैदल के इलावा कोई विकल्प नहीं। शहर वासियों को सेक्टर में कहीं पहुंचना हो साधन के लिए घंटों तक रोड पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। ऑटो चालक भी चार गुणा किराया लेने के बाद ही सेक्टर में जाने के लिए तैयार होते है। पांच किलोमीटर के दायरे में फैला है सेक्टर

शहर के बाहर की तरफ बना सेक्टर पांच किलोमीटर की दूरी में बसा हुआ है। सेक्टरों में ही आयकर विभाग, डीटीपीओ, हुडा, डिस्पेंसरी और पुलिस चौकी व अन्य कई दफ्तर भी स्थित है। जिसमें लोगों का आना जाना लगा रहता है। ऐसे में सेक्टर वासियों को भी किसी मजबूरी के चलते किसी अन्य स्थान पर जाना पड़ता है तो कोई भी विकल्प नहीं है।

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सेक्टर काफी दूरी तक फैला हुआ है। लेकिन यहां पर आने जाने के लिए कोई भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है। अगर घर से किसी अन्य स्थान के लिए जाना हो तो यहां से कोई भी आटो नहीं मिल पाता। इसके कारण अपना ही साधन लेकर जाना दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है।

सुदंर सिंह, सेक्टर वासी

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थेहड़ के बाद हाउसिग बोर्ड के सेक्टरों में बसाया गया था। सेक्टर में स्थित डिस्पेंसरी में दवाई लेने या किसी अन्य स्थान पर जाना होता है तो यहां कोई भी आटो व ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं मिल पाती। कई बार तो पैदल ही यहां तक पहुंचना पड़ता है तो कई बार किसी अन्य व्यक्ति का साधन मांग कर यहां पर पहुंचना पड़ता है।

चरण सिंह, आमजन

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सेक्टर में स्थित डिस्पेंसरी में दवाई लेने के लिए कई बार पहुंचना पड़ता है। अगर किसी आटो चालकों से डिस्पेंसरी में छोड़ने के लिए कहा जाता है तो वह भी 100 रुपये की मांग करते है। अन्य कोई विकल्प न होने के कारण मजबूरन अधिक किराया देना पड़ता है।

लीलाराम, आमजन

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कई बार इस क्षेत्र में कार्य के लिए आते है तो हुडा चौक पर आधा घंटा खड़ा होने के बाद ही यहां का साधन मिल पाया है और उसे भी अधिक किराया देकर यहां पर पहुंच पाए है। जबकि यहां से वापस पैदल ही जाना पड़ेगा और कोई भी विकल्प नहीं है।

अंजना, कंगनपुर रोड वासी

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हर रोज यहां पर काफी संख्या में लोग आवाजाही करते है वह भी पैदल आते और जाते हुए दिखाई देते है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कोई सुविधा न होने के कारण लोगों को पैदल चलकर यात्रा करनी पड़ती है जबकि दो किलोमीटर पैदल चलने के बाद मेन रोड से ही कोई साधन मिल पाता है।

संतोष रानी, कंगनपुर रोड वासी

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