सिरसा, जागरण संवाददाता। सिरसा के गांवों में पंच और सरपंच चुने जा चुके हैं। अभी उन्हें पदभार भी नहीं संभाला है इससे पहले ही विरोधी खेमे के लोग सक्रिय हो गए हैं। जीत के बाद पंचायत प्रतिनिधियों का रिकार्ड मांगा जाने लगा है। कोई सरकारी भूमि पर कब्जे संबंधी दी गई जानकारी की कापी मांग रहा है तो सबसे अधिक शैक्षणिक दस्तावेज की कापी मांग रहा है। ज्यादा आरटीआइ चुने हुए सरपंचों के खिलाफ आनी शुरू हुई है जिसमें उनसे संबंधित रिकार्ड मांगा जाने लगा है।

आरटीआइ उपायुक्त कार्यालय पहुंची

सिरसा में सरपंचों के खिलाफ आरटीआइ आने की शुरूआत तीन दिन से हो रखी है। दस से अधिक सरपंचों का रिकार्ड अलग-अलग खंडों से मांगा गया है। कुछ आरटीआइ उपायुक्त कार्यालय पहुंची है तो कुछ पंचायत विभाग के पास पहुंच रही है। बताया जा रहा है कि एक आरटीआइ में तो चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा खर्च के बारे में भी पूछा गया है।

पहले भी आरटीआइ से कई सरपंचों पर गाज गिरी थी

विभाग भी शैक्षणिक दस्तावेज की करवा रहा जांच राज्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव हो चुके जिलों में चुने हुए प्रतिनिधियों के शैक्षणिक दस्तावेज की जांच के निर्देश दे रखे हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच तत्काल करवाई जाए। चुनाव आयोग शपथ से पहले ही दस्तावेजों की जांच करवाना चाहता है ताकि बाद में कोई परेशानी न आए। बता दें कि पहले भी आरटीआइ से कई सरपंचों पर गाज गिरी थी और उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

जिला परिषद और ब्लाक समिति का परिणाम आना शेष सिरसा में सरपंच व पंचों का ही परिणाम घोषित हुआ है। चुनाव उपरांत 12 नवंबर को ही परिणाम घोषित कर दिया गया। कुछ ही गांवों में परिणाम को लेकर एतराज भी जताया गया है। अब जिन गांवों में कोई विवाद नहीं था वहां से भी आरटीआइ आने लगी है। जिला परिषद तथा ब्लाक समिति का मतदान हो चुका है और मतगणना 27 नवंबर को है। ऐसे में 27 नवंबर के बाद जिला परिषद और ब्लाक समिति के चुने हुए प्रतिनिधियों के दस्तावेज आरटीआइ से मांगें जाने संभावित है।

Edited By: Naveen Dalal

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