मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

संवाद सहयोगी, डबवाली:

नटखट ने पंचायतीराज में महिलाओं की स्थिति पेश की। बताया कि पंचायतों में पद आरक्षित होने के बावजूद महिला सरपंच या पंच केवल मुहर या फिर हस्ताक्षर हैं। इसकी वजह खुद महिला जनप्रतिनिधि हैं। पद आरक्षित होने की वजह से महिलाओं से नामांकन दाखिल करवाया जाता है। जीतने के बाद महिलाएं पंचायती बैठकों या फिर प्रशासनिक बैठकों में सिर्फ हस्ताक्षर करती नजर आती हैं। नटखट संस्था की ओर से बुधवार को पंचायतीराज दिवस पर एचपीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में पंचायतीराज में महिला जनप्रतिनिधियों की स्थिति बयां की। बच्चों ने चकजालू, राजस्थान के सोडा तथा गुजरात की पुनसारी पंचायत की भूमिका को उभारकर महिला नेतृत्व वाली सशक्त पंचायतों का वर्णन किया। 12वीं के जसकरण सरपंच, नेहा, जश्नदीप, कमलदीप कौर, दविद्र कौर, रमनदीप कौर ने पंचों की भूमिका अदा की। कला संकाय की रमनदीप कौर ने कहा कि ग्राम पंचायतों को राजनीति से ऊपर उठकर गांवों के विकास की बात सोचनी होगी।

विद्यालय शिक्षा निदेशिका सुजाता सचदेवा तथा इतिहास की लेक्चरर सरोज रानी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आर्यों के आगमन से पूर्व ही यहां ग्राम राज्य एवं ग्राम पंचायत का पूर्ण विकास हो चुका था। प्रत्येक गांव में एक ग्राम पंचायत होती थी, जिसमें एक मुखिया और अन्य प्रतिनिधि सदस्य होते थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इनकी प्रासंगिकता बनी रही, इसलिए भारत में पंचायतीराज व्यवस्था को संवैधानिक रूप से लागू किया गया है। 12वीं की नेहा ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम, तालुका और जिला आते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की थी।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप