सिरसा में नाबालिग से दुष्कर्म, दोषी को 20 साल की सजा; गर्भवती होने के बाद सामने आया था मामला
सिरसा की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी हरप्रीत सिंह को 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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सिरसा में नाबालिग से दुष्कर्म। सांकेतिक फोटो
HighLights
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में हरप्रीत सिंह दोषी करार।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 20 साल कारावास, 50 हजार जुर्माना सुनाया।
वैज्ञानिक साक्ष्य और डीएनए रिपोर्ट फैसले का आधार बनी।
जागरण संवाददाता, सिरसा। पोक्सो मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिगा से दुष्कर्म के मामले में आरोपित हरप्रीत सिंह को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. नरेश कुमार सिंघल ने सोमवार को साइंटिफिक एविडेंस समेत मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया। सरकार की ओर से मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी अमित मेहता ने की।
आठवीं कक्षा में पढ़ती थी पीड़िता, धर्मशाला में ले जाकर दोषी ने दिया वारदात को अंजाम अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला 25 जुलाई 2024 को महिला थाना डबवाली में दर्ज किया गया था। पीड़िता उस समय आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। शिकायत के अनुसार करीब छह माह पहले उसकी आरोपित से दोस्ती हुई थी। जनवरी 2024 में आरोपित उसे डबवाली स्थित धर्मशाला के पास मिला और बातचीत करने के बहाने कमरे में ले गया।
आरोप है कि वहां उसने नाबालिगा के साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता के अनुसार इसके बाद भी आरोपित ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। जुलाई 2024 में पीड़िता को मासिक धर्म नहीं आया तो उसने अपनी मां को पूरी घटना बताई।
मां ने प्रेग्नेंसी किट से जांच की, जिसमें पीड़िता के गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद मां उसे लेकर महिला थाना डबवाली पहुंची और आरोपित के खिलाफ शिकायत दी। जिस पर पुलिस ने आरोपित हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया।
साइंटिफिक एविडेंस से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष
उप जिला न्यायवादी अमित मेहता ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों को महत्वपूर्ण माना गया। पुलिस जांच के दौरान मेडिकल, डीएनए समेत वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए अदालत में प्रस्तुत किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपित को दोषी ठहराते 20 साल कारावास व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
