जागरण संवाददाता, सिरसा : उपायुक्त रमेश चंद्र बिढ़ाण ने कहा कि भूमि से हमें खाद्यान प्राप्त होते हैं, ऐसे हमें हमारी यह जिम्मेवारी बढ़ जाती है कि हम अपनी भूमि के स्वास्थ्य का अधिक ख्याल रखें। फसल कटाई के सीजन के दौरान प्रतिवर्ष किसानों द्वारा फसल अवशेष जलाने से वातावरण में प्रदूषण का मात्र बढ़ जाती है, जिससे जहां एक तरफ भूमि बंजर होती है वहीं वायु प्रदूषण से मानव जीवन व जीव जंतुओं पर भी संकट मंडराने लगता है। -------- कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए प्रदूषण ज्यादा घातक

उपायुक्त बिढ़ाण ने बताया कि फसल अवशेषों में आग लगाने से हवां में प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से पीएम 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है और सांस लेने में तकलीफ होती है और कोरोना संक्रमित रोगियों के लिए ज्यादा घातक हो सकता है। इसके अतिरिक्त फसल अवशेष जलाने से पैदा हुए धूएं से अस्थमा व कैंसर जैसे रोगों को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि पराली को जलाने से भूमि में मौजूद कई उपयोगी बेक्टीरिया व कीट नष्ट हो जाते हैं वहीं मिट्टी की जैविक गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि किसान राष्ट्रीय कृषि नीति की पालना करके पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा बॉयोमास एनर्जी, खेतों में छप्पर तथा मशरुम की खेती आदि में भी फसल अवशेष का प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कोई भी किसान, व्यक्ति खेतों में पराली जाता है तो आईपीसी की धारा 188 के तहत उसे 6 माह की जेल व 15 हजार रुपये तक का जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान है। ------------ सरपंच निभाएं अपना दायित्व, ग्रामीणों को करें फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रेरित

उपायुक्त रमेश चंद्र बिढ़ाण ने जिले की ग्राम पंचायतों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने गांवों में ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों को पराली न जलाने की शपथ भी दिलवाएं। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच व दृढ संकल्प से ही हम जिला में पराली जलाने की घटनाओं पर शत प्रतिशत अंकुश लगा सकते हैं, इसलिए सरपंच अपना दायित्व गंभीरता से निभाएं और ग्रामीणों को पराली न जलाने के लिए जागरुक करें।

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