संवाद सहयोगी, कालांवाली :

सरकार व दैनिक जागरण द्वारा धान की पराली न जलाने को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है, जागरूकता के चलते गांव देसू मलकाना में किसानों द्वारा पराली को आग न लगाकर सुपर सीडर द्वारा खेतों में ही नष्ट किया जा रहा है।

देसूमलकाना के किसान जसपाल सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा जो पराली न जलाने को लेकर अभियान शुरू किया गया है वह सराहनीय है। सरकार द्वारा प्रचार किया जा रहा है कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति भी नष्ट हो जाती है। पराली के जलाने से वातावरण दूषित होता है और अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करता है जबकि पराली को भूमि में ही मिश्रित कर अच्छी पैदावार ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार उसने पराली को एकत्रित कर गोशाला में भेजा था जिस पर समय भी ज्यादा लगा था और खर्च भी ज्यादा आया था। जिसके चलते उसने इस बार सरकार द्वारा सब्सिडी पर दी जा रही सुपर सीडर मशीन खरीद कर लाया, उसके द्वारा पराली को खेत में ही नष्ट कर रहे है। -------- किसान हो रहे हैं जागरूक, अब नहीं जला रहे पराली

किसान जसपाल सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक किया गया था कि वे पराली न जलाएं। इससे किसान जागरूक हुए हैं और अब पराली नहीं जला रहे हैं। अभी भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है और कृषि यंत्रों की जानकारी और उन पर मिल रहे अनुदान के लिए भी उन्हें बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेत में पराली नष्ट करने का कितना का लाभ होगा ये तो गेहूं की फसल तैयार होने के बाद पता चलेगा, परंतु फिलहाल सुपर सीडर के द्वारा पराली को खेतों में नष्ट करने पर प्रति एकड़ पर करीब एक हजार रुपये खर्च आ रहा है जो ज्यादा है। सरकार इसके लिए भी किसानों को अलग से बोनस दे तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।

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