संवाद सहयोगी, डबवाली : डबवाली अनाज मंडी का निर्माण साढ़े चार दशक पहले हुआ था। ऐसे में सीवरेज लाइन वर्षों पुरानी है। लाइन का सुधारीकरण नहीं किया गया। इस वजह से अनाज मंडी पानी से भर जाती है। बरसाती पानी की निकासी होने में घंटों लग जाते हैं। बारिश में जहां उपज भीग जाती है, वहीं जलभराव से अनाज को नुकसान पहुंचता है। मंगलवार शाम को बरसात के कारण अनाज मंडी में कपास की ढेरी भीग गई। बुधवार को आढ़ती तथा किसान फसल सुखाते नजर आए।

दैनिक जागरण में छपी खबर के बाद मार्केट कमेटी अधिकारियों ने अनाज मंडी के बी ब्लाक में भरे पानी की निकासी करवाई। बताया जाता है कि मेनहोल गंदगी से भर हुए थे। सफाई करवाने के बाद पानी की निकासी संभव हुई। बुधवार को एसडीएम राजेश पूनिया ने आगामी फसली सीजन को देखते हुए मार्केट कमेटी अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

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अनाज मंडी में सीवरेज व्यवस्था का बुरा हाल है। साढ़े चार दशक पहले बनी मंडी की जरूरत के मुताबिक सीवरेज लाइन बिछाई गई थी। उसके बाद मार्केटिग बोर्ड ने कोई कदम नहीं उठाया। इस वजह से फसली सीजन में फसल की बर्बादी होती है। जमींदार, आढ़ती तथा मजदूर तीनों वर्ग प्रभावित हैं। हमारी तो यही मांग है कि अनाज मंडी की सीवरेज व्यवस्था में सुधार किया जाए। सीजन शुरू होने में नौ दिन शेष बचे हैं।

- गुरदीप कामरा, प्रधान, कच्चा आढ़ती एसोसिएशन, डबवाली।

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अनाज मंडी में सीवरेज लाइन काफी छोटी है। इस वजह से पानी निकासी में ज्यादा समय लगता है। मार्केटिग बोर्ड की तकनीकी शाखा को इस संबंध में बताया गया है। फिलहाल मेनहोल की सफाई करवाकर बरसाती पानी की निकासी करवा दी गई है।

-वीरेंद्र मेहता, सचिव, मार्केट कमेटी, डबवाली।

Edited By: Jagran