जागरण संवाददाता, सिरसा :

कृषि वैज्ञानिक डा. देवेंद्र जाखड़ ने कहा कि किसान फसलों में रासायनिक खादों का अंधाधुंध प्रयोग न करें। रसायनिक खादों का अत्यधिक इस्तेमाल खेती के लिए खतरनाक बनता जा रहा है। डा. जाखड़ मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र में जिला स्तरीय उर्वरक जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि किसान फसलों में बिना सोचे समझे अंधाधुंध कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे फसल की लागत तो बढ़ती ही है दूसरी ओर वातावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। उन्होंने बताया कि फसलों में जैविक खादों का प्रयोग कर पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फसल की बुआई के समय देसी खाद जरूर डालें। इससे किसान फसल की लागत को कम कर अधिक मुनाफा ले सकते हैं। उन्नत किस्मों के बारे में दी जानकारी कृषि वैज्ञानिक डा. सुनील बैनीवाल ने कहा कि किसान उन्नत किस्मों की बिजाई करें। गेहूं की फसल की बुआई लाइन व पंक्ति में करने तथा रोटावेटर या डिस्क हैरो से जुताई करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि पौधों में 16 किस्म के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक ऋषि कुमार ने कहा कि किसानों फसलों की तरफ विशेष ध्यान दें। बिजाई करते समय किसान बीजोपचार करें। डा. बीएस श्योकंद ने कहा कि किसान फसलों के साथ पशुपालन करें। इससे किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। वहीं किसान पशुओं के गोबर से जैविक तरीके से खाद तैयार कर सकते हैं। इसे फसलों में डालने से रासायनिक खादों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। केंद्र के डा. ओपी सिंह ने कहा कि किसान फसलों के साथ सब्जी लगाए। जो बाजारों में सब्जियां बेची जाती है। उसमें अधिक रासायानिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। इससे सेहत न बनकर सेहत खराब करती है।

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