जागरण संवाददाता, सिरसा : हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लगाई जा रही राष्ट्रीय लोक अदालत में केसों की त्वरित सुनवाई हो रही है। इस वर्ष अब तक राष्ट्रीय लोक अदालत में 1430 सिविल व फौजदारी केसों का निपटारा हो चुका है। जनवरी से लेकर सितंबर तक 6667 केस लोक अदालत समक्ष सुनवाई के लिए आए। इनमें चैक बाउंस, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना, घरेलू विवाद, बिजली व पानी से संबंधित विवाद, दिवानी व फौजदारी विवाद शामिल थे। अगली लोक अदालत 14 दिसंबर को न्यायालय परिसर में आयोजित की जाएगी।

लोगों को जल्द इंसाफ देने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय लोक अदालतें लगाई जाती है। इस अदालत की खास बात ये है कि इसमें फैसला होने के बाद फैसले को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। लोक अदालत की प्रक्रिया बिल्कुल संक्षिप्त व साधारण है, जिसमें दोनों पक्षों की सहमति से केस का निपटारा किया जाता है और लोक अदालत में किए फैसले की कोई अपील भी नहीं होती।

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विचाराधीन कैदियों को दी जाती है कानूनी सहायता

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता भी दी जाती है। इसके लिए विधिक सेवा द्वारा जेल परिसर में मुफ्त कानूनी सहायता केंद्र की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें पैनल अधिवक्ता जेल के अंदर जाकर कानून की जानकारी व

केस लडऩे के लिए वकीलों की सेवाओं की दरख्वास्त लेकर सेवाएं प्रदान की जाती है। 4.62 करोड़ का दिया मुआवजा

सितंबर माह तक राष्ट्रीय लोक अदालत ने सिविल व फौजीदारी केसों का निपटारा कर पीड़ित लोगों को 4 करोड़ 62 लाख 58 हजार 890 रुपये का मुआवजा दिया है। इससे पीड़ित परिवारों को काफी राहत मिली। जल्दी न्याय मिलने से उनमें न्याय पालिका के प्रति विश्वास जगा। आपसी ताल-मेल सेहल न हो पाने वाले संगीन आपराधिक मामले जैसे कि किसी की हत्या आदि के अलावा सभी प्रकार के मामलों को लोक अदालत लाया जा सकता है, इस प्रकार के अपराधों को दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 320 में विस्तार से लिखा गया है। जैसे कि वैवाहिक मामले, सिविल मामले पेंशन और अन्य सेवा संबंधी मामले मनरेगा से जुड़े मामले, बिजली, पानी, बैंक से जुड़े मामले इत्यादि।

Posted By: Jagran

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