जागरण संवाददाता, सिरसा : हरियाणा में वन्य जीवों की शरणस्थली सिरसा में भी निरीह प्राणी बेबस हो गए हैं। कारण है कि वन्य जीव विभाग के पास सहायता के लिए समुचित संसाधन भी नहीं हैं। स्टाफ के नाम पर दो कर्मचारियों व एक अधिकारी की तैनाती है। इसके अलावा विभाग के पास एंबुलेंस व अन्य चिकित्सा सुविधाएं तक नहीं हैं। वन्य जीव के घायल होने की स्थिति में विभाग के पास इतना भी प्रबंध नहीं कि वे सिरसा में ही इलाज करवा सके। इसके लिए जीव को 90 किलोमीटर दूर हिसार भेजना पड़ता है। इस दौरान जीव का बचना या न बच पाना सब परिस्थितियों के हाथ में है।

सिरसा का अबूबशहर क्षेत्र काले हिरणों के लिए मशहूर है। यहां हिरणों की कई ऐसी प्रजातियां है जो विलुप्त प्रजातियों की श्रेणी में हैं। हिरणों पर ही सबसे अधिक खतरा मंडराया हुआ है। शिकारी कुत्ते हिरणों के दुश्मन बने हुए हैं। हड्डारोड़ी में रहने के कारण कुत्ते मांसाहारी हो गए हैं और ये कुत्ते समूह बनाकर हिरणों का शिकार कर रहे हैं। इसके अलावा शिकारी कुत्ते नीलगायों को भी मार रहे हैं। समूह में रहने वाले कुत्ते हिरण व नीलगाय के बच्चों का आसानी से शिकार करते हैं।

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अब बचे हैं 500 से कम हिरण

जिले में वन्य प्राणियों की प्रजातियों पर संकट है। हिरण की बात करें तो जिला में करीबन 500 हिरण ही बचे हैं और साल दर साल बढ़ोतरी की बजाय इनकी संख्या घट रही है। वन्य प्राणियों से जुड़े विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आवारा व शिकारी कुत्ते प्रजनन करने के दौरान भी हिरण का शिकार कर रहे हैं। इसके अलावा हिरण के छोटे बच्चे व गर्भवती हिरण को आसानी से मार देते हैं।

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रेसक्यू सेंटर के बिना नहीं बनेगी बात

कुत्तों के हमले या फिर किसी अन्य कारण से घायल हुए वन्य प्राणी का इलाज भी जद्दोजहद भरा है। घायल वन्य जीव को इलाज के लिए हिसार भेजना पड़ता है जो कि 90 से 150 किलोमीटर दूर पड़ता है और इसी दौरान घायल जीव की मौत भी हो जाती है। विभाग के पास जहां रेसक्यू सेंटर हो तो तमाम सुविधाएं उसे यहीं मिल सकती हैं। रेसक्यू सेंटर में एंबुलेंस, चिकित्सकीय सुविधाएं व कवर्ड मैदान होना चाहिए जहां घायल जीव को रखा जा सके।

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यहां तो कुछ भी नहीं है : बिश्नोई

राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड के सदस्य ओपी बिश्नोई ने कहा कि वर्षो से वे वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लड़ रहे हैं किंतु यहां तो कोई सुविधाएं नहीं हैं। बोर्ड का सदस्य होने के नाते वे लगातार बैठक में इन मुद्दों को उठा रहे हैं और रेसक्यू सेंटर तो अब बनवाकर रहेंगे।

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जल्द इलाज के लिए प्रबंध जरूरी

वन्य जीव निरीक्षक ने कहा कि रेसक्यू सेंटर होना चाहिए ताकि घायल वन्य जीव को समय पर उपचार मिल सके। इसके अलावा भी दूसरी सुविधाओं को लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।

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