मामन की बहू और हरियाणवी अंदाज... कौन हैं कविता नांदल? नवरात्र में माता के जगराते से मिली पहचान, देशभर से आ रहा बुलावा
कविता नांदल, जिन्हें 'मामन की बहू' के नाम से जाना जाता है, 37 साल की उम्र में भजन-कीर्तन से शुरुआत ...और पढ़ें

रोहतक की कविता नांदल। फोटो जागरण
HighLights
37 साल की उम्र में भजन-कीर्तन से की शुरुआत।
'मामन की बहू' नाम से हरियाणवी संस्कृति की पहचान बनीं।
अपनी गायकी से महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं कविता।
प्रिया पंवार, रोहतक। मामन की बहू के नाम से फेमस कविता नांदल आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। इंटरनेट मीडिया पर इनकी कई रील वायरल होती हैं और वह हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने और भगवान के भजनों को गाती हुई नजर आती हैं।
उनकी हरियाणवी बोली और देशी अंदाज लोगों को पसंद आता है और उनके गाए हुए गीत लोगों के दिल तक पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि कविता को रोहतक में ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई जिलों के साथ दिल्ली, राजस्थान, और उत्तर प्रदेश में भी भजन-कीर्तन और जागरण करने के लिए बुलाया जाता है।
गायकी और हरियाणवी अंदाज से लोगों के दिलों में बनाई जगह
दरअसल, गढ़ी बोहर की रहने वाली कविता नांदल आज अपनी पहचान मामन की बहू के नाम से बना चुकी हैं। अपनी गायकी और हरियाणवी अंदाज से उन्होंने लोगों के दिलों में जगह बनाई है। कभी परिवार तक सीमित रहने वाली कविता आज अपनी कला के दम पर न केवल नाम कमा रही हैं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में भी अहम भूमिका अदा कर रही हैं।
कविता नांदल की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने हुनर को पहचान नहीं दे पातीं। उन्होंने उम्र को अपने सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। 37 साल की उम्र में भजन-कीर्तन से शुरुआत करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे गायकी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। हरियाणवी गीतों से मिली प्रसिद्धि ने उन्हें मामन की बहू के नाम से लोकप्रिय कर दिया।
भजन-कीर्तन से शुरू हुआ सफर
कविता नांदल ने बताया कि उन्हें भजन गाने का शौक था। जिसके चलते उन्होंने घर-घर जाकर भजन-कीर्तन करना शुरू किया। शुरुआत में यह उनके लिए गायकी से जुड़ने का एक माध्यम था, लेकिन धीरे-धीरे उनका रुझान बढ़ता गया।

हरियाणवी सिंगर कविता नांदल- फोटो जागरण
भजन-कीर्तन के जरिए उन्होंने अपनी आवाज को लोगों तक पहुंचाना शुरू किया। इसके बाद हरियाणवी गीतों से जुड़ाव ने उनके सफर को नई दिशा दी। अपनी आवाज और हरियाणवी संस्कृति से जुड़े गीतों के कारण वह लोगों के बीच पहचान बनाने में सफल रहीं।
सातवीं पास हैं कविता नांदल, बेटी चलाती है सोशल मीडिया
कविता नांदल ने बताया कि वह सातवी पास हैं। उनकी बेटी ही उनके इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स को संभालती है। वह दिल से गाती हैं। नाचै गावै हरियाणा चैनल जैसा प्लेटफार्म मिलने के बाद उन्हें ज्यादा प्रसिद्धि मिली। जिसके बाद लोगों ने उन्हें एक कलाकार के रुप में स्वीकार किया और अब उनकी रील को लाखों व्यूज मिलते हैं।
