रोहतक PGIMS में ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख खराब, मंत्री बोलीं- इस केस को मिसाल बनाएंगे; जांच के आदेश जारी
रोहतक पीजीआईएमएस में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद एक मरीज की बाईं आंख की रोशनी चली गई। मंत्री श्रुति चौधरी ने ...और पढ़ें

मंत्री श्रुति चौधरी ने मामले को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र जांच समिति गठित की (जागरण फाइल)
HighLights
पीजीआईएमएस में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद मरीज की आंख खराब।
मंत्री श्रुति चौधरी ने मामले की गंभीरता पर जवाब तलब किया।
स्वतंत्र जांच समिति गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जागरण संवाददाता, रोहतक। पीजीआइएमएस रोहतक में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के बाद महम के रतनलाल की बाईं आंख की रोशनी चले जाने का मामला अब जिला प्रशासन के सामने गंभीर सवाल बनकर पहुंचा है। महम निवासी मरीज रतनलाल ने बताया कि 20 जून 2026 को ऑपरेशन के बाद आंख से दिखाई देना बंद हो गया।
इसके बाद वह इलाज और समाधान के लिए 10 से 15 बार पीजीआइएमएस के चक्कर लगाते रहे, लेकिन हर बार उन्हें जल्द दिखाई देने का आश्वासन दिया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर एम्स दिल्ली और अन्य नेत्र विशेषज्ञों से राय ली और अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये उपचार पर खर्च हो चुके हैं। मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि मामला गंभीर है, यदि जांच में किसी स्तर पर गलती या लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहती हैं और फैसले को ऐसा उदाहरण बनाया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए।
मामला बुधवार को जिला लोक संपर्क एवं परिवेदना समिति की बैठक में उठा तो महिला एवं बाल विकास और सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने पीजीआइएमएस प्रशासन से जवाब तलब किया।
पीजीआइएमएस के मेडिकल सुप्रींटेंडेंट डा. सुधीर अत्री ने बताया कि शिकायत के आधार पर पीजीआइएमएस में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। इस पर मंत्री ने कहा कि केवल विभागीय समिति की जांच पर्याप्त नहीं होगी। डाक्टर अपनी गलती की जांच कैसे करेंगे। उन्होंने एडीसी नरेंद्र कुमार, सीएमओ और ज्वाइंट डायरेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों की समिति बनाकर पूरे मामले की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
23 हजार का लैंस बाहर से खरीदा, आयुष्मान कार्ड भी था
रतनलाल ने बताया कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए उन्होंने बाहर से करीब 23 हजार रुपये का लैंस खरीदा था। उनका कहना है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद लैंस के लिए उन्हें मना कर दिया गया। 20 जून को ऑपरेशन के सप्ताहभर बाद भी आंख से नहीं दिखाई दिया। करीब एक सप्ताह बाद पीजीआइ में फालोअप कराया और चिकित्सकों को समस्या बताई। इसके बाद कई बार अस्पताल जाने के बावजूद समस्या बनी रही।
रतनलाल का आरोप है कि हर बार दवा लिखकर और इंतजार करने की बात कही गई। जब आंख की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उन्होंने दिल्ली में भी जांच कराई। उनके अनुसार वहां चिकित्सकों ने आंख की स्थिति को गंभीर बताते हुए समय पर रेफर किए जाने की जरूरत बताई। रतनलाल का दावा है कि अलग-अलग जगह उपचार और जांच पर अब तक करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
निदेशक को शिकायत से लेकर परिवेदना समिति तक पहुंचा मामला
मरीज ने पहले पीजीआइएमएस निदेशक को शिकायत दी। सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए बाद में डीसी के समक्ष शिकायत रखी। इसके बाद मामला जिला लोक संपर्क एवं परिवेदना समिति की बैठक में पहुंचा।
यहां सुनवाई के दौरान मंत्री ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। एडीसी नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस तरह का एक मामला पहले भी सामने आया था। उसमें जांच के बाद कार्रवाई के लिए रिपोर्ट चंडीगढ़ मुख्यालय भेजी गई थी।
पहले भी आ चुका है मामला, दी थी आर्थिक मदद
बता दें कि इससे पूर्व भी पीजीआइएमएस में मोतियाबिंद के इलाज के लिए पहुंचे इस्माईला गांव के 40 वर्षीय राजू की दाईं आंख की रोशनी ऑपरेशन के बाद चले जाने का मामला सामने आया था। राजू के अनुसार 26 जून 2024 को मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ और उसी दिन उन्हें घर भेज दिया गया था।
रात में आंख में तेज दर्द होने पर अगले दिन पीजीआइ पहुंचे, जहां जांच में दाईं आंख की रोशनी जाने की जानकारी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विकास और पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने जिला परिवेदना समिति की बैठक में अस्पताल प्रशासन को उपचार और क्षतिपूर्ति का खर्च उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वयं भी स्वैच्छिक कोष से समान राशि देने और रेडक्रास से सहायता दिलाने को कहा था।
