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रोहतक से दिल्ली तक बना ग्रीन कॉरिडोर, 7 घंटे थमा ट्रैफिक, 300 जवान तैनात; ब्रेन डेड मुन्नादास ने बचाई 4 जिंदगियां

Published: Fri, 18 Sep 2026 08:13 AM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 08:31 AM (IST)

पीजीआईएमएस रोहतक में एक प्रवासी मजदूर के ब्रेन डेड होने के बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला किया।

रोहतक से दिल्ली तक 7 घंटे का बना 'ग्रीन कॉरिडोर' (फाइल फोटो)

रोहतक से दिल्ली तक 7 घंटे का बना 'ग्रीन कॉरिडोर' (फाइल फोटो)

HighLights

  1. प्रवासी मजदूर मुन्ना दास के परिवार ने किया अंगदान का फैसला

  2. चार जरूरतमंद मरीजों को मिले नए अंग, मिली नई जिंदगी

  3. रोहतक से दिल्ली तक 7 घंटे चला ग्रीन कॉरिडोर, पुलिस तैनात

जागरण संवाददाता, रोहतक। पीजीआइएमएस रोहतक में एक प्रवासी मजदूर परिवार ने पति और पिता को खोने के बाद ऐसा फैसला लिया, जिसने चार जरूरतमंद मरीजों को जीवन की नई उम्मीद दी। बिहार के रहने वाले करीब 40 वर्षीय मुन्ना दास को 12 सितंबर को सड़क हादसे के बाद ट्रामा सेंटर के आइसीयू में भर्ती कराया गया था।

सिर में गंभीर चोट के कारण चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद 17 सितंबर को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। परिवार रोहतक में मजदूरी करने आया था। पति की मौत से पत्नी और बच्चे सदमे में थे।

पत्नी ने पेश की मानवता की मिसाल

इसी बीच परिवार ने अंगदान की सहमति दी। पत्नी ने कहा कि पति दुनिया से चले गए हैं, लेकिन उनके अंगों से किसी दूसरे परिवार का सदस्य जीवित रह सके, इससे बड़ी बात नहीं हो सकती।

परिवार की सहमति के बाद नोटो, रोटो नार्थ और सोटो हरियाणा के समन्वय से अंगों का आवंटन किया गया। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि यह परिवार दुख की घड़ी में मानवता की मिसाल बना है।

कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन दाता परिवार के साथ खड़ा है और पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ पैतृक गांव भेजा जाएगा।

निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने ट्रामा, एनेस्थीसिया और सोटो टीम के प्रयासों की सराहना की। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने पुलिस और आर्मी अस्पताल का आभार जताते हुए कहा कि एक साधारण प्रवासी मजदूर परिवार ने अंगदान के माध्यम से मानवता की बड़ी मिसाल पेश की है।

इस दौरान डॉ. सुखबीर सिंह, डॉ. गौरव, डॉ. विवेक, डॉ. अंकुर, डॉ. मंजूनाथ बीसी, डॉ. योगेश, ट्रांसप्लांट समन्वयक रोहित तंवर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

चार मरीजों को मिले अंग

पीजीआइएमएस रोहतक को एक किडनी और आर्मी अस्पताल चंडीमंदिर को दूसरी किडनी आवंटित की गई। लीवर और हृदय दिल्ली के अस्पतालों में भेजे गए। इस तरह दान किए गए अंगों से चार मरीजों को जीवन मिलने की उम्मीद बनी।

रोहतक से दिल्ली तक बना ग्रीन कॉरिडोर

कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल के अनुसार अंगों को समय पर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए दोपहर तीन बजे से रात 10 बजे तक रोहतक से दिल्ली तक ग्रीन कारिडोर बनाया गया।

आर्मी अस्पताल चंडीमंदिर से हेलीकाप्टर बाबा मस्तनाथ हेलीपैड, अस्थल बोहर पहुंचा। इसके लिए रोहतक, झज्जर, बहादुरगढ़ और दिल्ली पुलिस के करीब 300 जवान और अधिकारी तैनात रहे।

पूर्व मेयर मनमोहन गोयल भी सूचना मिलने पर ट्रामा सेंटर पहुंचे और परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार के अंगदान के निर्णय की सराहना की।

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