जागरण संवाददाता, रोहतक : पराली प्रबंधन पर जिले के किसानों में जागरूकता बढ़ी है। पराली जलाने के बजाय कोई गोशाला में दान कर रहा है तो कोई चारा बनाकर दिल्ली व राजस्थान बेचकर मुनाफा उठा रहा है। वहीं, बैंसी गांव निवासी किसान गुरदीप सिंह ने पराली का उचित प्रबंधन किया है। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर इस किसान ने पराली के बंडल बनवाकर रख लिए हैं। पंजाब से आई मशीन से ही उन्होंने पराली के बंडल बनवा दिए और उनको आधा एकड़ जमीन में एकत्रित कर लिया।

किसान गुरदीप का कहना है कि पराली प्रबंधन के लिए कुछ नया करने का प्रयास रहता है। इसी कारण पराली को इस बार थर्मल प्लांट में बेचकर फायदा उठाया जाएगा। गुरदीप ने गांव में ही 55 एकड़ में धान की फसल लगाई थी। उनका कहना है कि सरकार की ओर से पराली के बंडल बनाने पर एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। थर्मल प्लांट में भी उनको पराली के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है।

उधर, कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिला में इस बार 59 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई गई। जिला में ज्यादातर किसानों ने पराली का प्रबंधन किया है। लेकिन जिले में नौ मामले पराली जलाने के भी सामने आए थे। जिनसे 32500 रुपये जुर्माना वसूला गया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार पराली जलाने के मामलों में भी कमी आई है। पिछले साल पराली जलाने के 11 मामले थे। किसानों ने पराली का सदुपयोग करने के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। पराली प्रबंधन की दिशा में बैंसी गांव निवासी गुरदीप सिंह बेहतर कार्य कर रहे हैं। बंडल बनाकर उसकी बिक्री से वे आय बढ़ा रहे हैं। उनको सरकारी सहायता राशि दी जाएगी। पराली प्रबंधन के प्रति जिले के किसानों में जागरूकता बढ़ रही है।

- रोहताश सिंह, जिला कृषि उप निदेशक, रोहतक

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