जागरण संवाददाता, रोहतक : एचआइवी पॉजिटिव दंपती के मौत के मामले में पीजीआइ में जांच करने पहुंची टीम को मौके पर डाक्टर ही नहीं मिले। टीम के सदस्यों की ओर से पीजीआइ के निदेशक को आधा घंटा पहले ही आने की सूचना दे दी गई थी। इसके बाद भी डाक्टर नदारद रहे और उनके ऑफिस पर ताला लटका मिला। काफी देर तक इंतजार करने के बाद टीम ने पीजीआइ स्थित एआरटी सेंटर का दौरा किया और वहां पर मौजूद डाक्टर से पूछताछ की। इस दौरान इलाज रिकॉर्ड में कहीं पर महिला का नाम ही गायब मिला तो कहीं पर उसके पति का। डाक्टर के गायब रहने पर टीम ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। रिकॉर्ड में नाम न मिलने पर उसे सील कर दिया है और भेजने के निर्देश दिए हैं।

सोनीपत के रहने वाले दंपती की जुलाई में पीजीआइ में मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक, 10 जुलाई को एक दंपती इलाज कराने के लिए पीजीआइ में पहुंचा था। वह और उसकी पत्नी समेत छोटी बच्ची एचआइवी की चपेट में थे। अभी तक यह सामने आया है कि इलाज न मिलने के कारण पहले 14 जुलाई को व्यक्ति की मौत हो गई। पीजीआइ के कर्मियों ने पैसे जुटाकर उसकी पत्नी को मृतक का अंतिम संस्कार के लिए पैसे दिए। इसके 10 दिन बाद ही पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। पत्नी की मौत से करीब तीन दिन पहले जब यह मामला प्रकाश में आया था और दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था तो एनजीओ की ओर से पहल करने के बाद पीजीआइ प्रशासन ने महिला को भर्ती किया था। मृतक दंपति की दो बच्चियों को पहले बाल आश्रम में रखा गया था। इसके बाद उन्हें बहादुरगढ़ भेज दिया गया। मृतक महिला की मौत के बाद से हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन ने पीजीआइ का दौरा किया था। जांच के लिए उन्होंने बाल कल्याण समिति के चेयरमैन डा. राज¨सह सांगवान की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया था। कमेटी ने पहले चरण में सोनीपत स्थित सिविल अस्पताल और दूसरे चरण में खानपुर कलां स्थित मेडिकल कॉलेज में जांच की थी। अब बुधवार को तीसरे चरण में जांच करने के लिए पंडित भगवत दयाल शर्मा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में पहुंची थी। आरोप है कि जांच टीम को सहयोग ही नहीं किया गया और सूचना देने के बाद भी डाक्टर नहीं मिले। हालांकि टीम ने पीजीआइ स्थित एआरटी यानी कि एंटी रिट्रोवायरल थैरेपी सेंटर पर जाकर मौजूद डाक्टर से पूछताछ की और रिकॉर्ड चेक किया। इस दौरान भारी खामियां सामने आईं।

जांच करने के लिए पहुंचे थे डीएसपी, सीएमओ और चेयरमैन

पीजीआइ में जांच करने के लिए कमेटी के अध्यक्ष बाल कल्याण समिति के चेयरमैन डा. राज¨सह सांगवान समेत चीफ मेडिकल ऑफिसर डा. अनिल बिरला और उप पुलिस अधीक्षक डा. र¨वद्र पहुंचे थे। एआरटी सेंटर में मौजूद डाक्टर से पूछताछ की गई और रिकार्ड चेक किया गया।

1.28 पर दी सूचना, दो बजे पहुंची टीम को डीएमएस गायब

जांच टीम ने पीजीआइ प्रशासन को दोपहर में करीब एक बजकर 28 मिनट पर आने की सूचना दी थी। जब दो बजे टीम पहुंची तो डीएमएस ही गायब मिले। इस संबंध में टीम ने पीजीआइ प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

इलाज की फाइल को सील कर भेजने के दिए निर्देश

एंटी रिट्रोवायरल थैरेपी सेंटर में पहुंची जांच टीम को भारी गड़बड़ियां मिलीं। इलाज की फाइल में कहीं पर पत्नी तो कहीं पर पति का नाम गायब मिला। जांच टीम ने मेडिकल रिकार्ड की फाइल को सील कर भेजने के निर्देश दिए हैं।

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सूचना देने के बाद भी मौके पर डीएमएस नहीं मिले। उनके ऑफिस पर ताला लटका मिला है। हम काफी देर तक इंतजार करते रहे। इसके लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मेडिकल रिकार्ड में नाम नहीं मिले हैं।

- डा. राज¨सह सांगवान, अध्यक्ष, जांच कमेटी।

Posted By: Jagran