ओपी वशिष्ठ, रोहतक : 22 साल लंबे इंतजार के बाद मौजूदा भाजपा सरकार ने हरियाणा में छात्र संघ के चुनाव कराने का ऐलान जब से किया है, तभी से विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में उत्सव का वातावरण देखने को मिलने लगा है। छात्र राजनीति में रुचि दिखाने वाले युवा चुनाव की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। पुराने छात्र संघ जो निष्क्रय हो गए थे, वो अब दोबारा से कैंपस में छात्र हितों के मुद्दों को उठाते दिख रहे हैं। इतना ही नहीं नए छात्र संगठन भी खड़े हो गए है, जो सरकार की घोषणा के बाद सुर्खियों में आए हैं। हालांकि छात्र संघ चुनाव को लेकर बहस भी छिड़ गई है। कोई छात्र संघ चुनाव के पक्ष में है तो कोई इसका विरोध कर रहा है। लेकिन युवाओं का रूझान चुनाव कराने की तरफ दिख रहा है। दैनिक जागरण छात्र संघ चुनाव को लेकर अभियान शुरू कर रहा है, जिसमें युवाओं के राय को सरकार व विवि प्रशासन तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।

गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्रों के बीच खून -खराबे को देखते हुए 1995 में छात्र संघ चुना पर रोक लगा दी थी। तभी से छात्र राजनीति हाशिए पर चली गई। छात्र संगठनों ने समय-समय पर चुनाव की मांग उठाई, लेकिन सभी सरकारों ने इसे इग्नोर किया। भाजपा सरकार ने 2014 के चुनाव से पहले घोषणा-पत्र में चुनाव कराने का आश्वासन दिया। सरकार बनने के बाद छात्र संगठनों ने इसको लेकर जोरदार ढंग से मांग उठाई, जिसमें इनसो ने तो आंदोलन ही शुरू कर दिया था। आखिरकार मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने छात्र संघ चुनाव कराने की पिछले दिनों घोषणा की। जब से मुख्यमंत्री ने चुनाव कराने का ऐलान किया है,तभी से विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में चुनावी माहौल दिखने लगा है। आखिर क्यों है छात्र राजनीति

- छात्र राजनीति से देश के लिए कुशल नेतृत्व के विकल्प खुलते हैं

- युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ती है

- छात्र राजनीति से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में नेतृत्व करने की भावना का विकास होता है

- विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के हितों का हनन नहीं हो सकता

- विवि की कार्यकारी परिषद, शैक्षणिक परिषद व अन्य कमेटियों में छात्रों का प्रतिनिधित्व

- शिक्षण संस्थानों में छात्र समस्याओं को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाया जा सकता है। --छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष होने चाहिए : बलवान सुहाग महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में छात्र संघ के पहले प्रधान एडवोकेट बलवान ¨सह सुहाग का कहना है कि छात्र संघ होना जरूरी है। छात्र राजनीति से ही देश को कुशल नेतृत्व मिलता है। अनेकों उदाहरण है कि जब छात्र राजनीति से ही देश की राजनीति में शीर्ष नेता पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होने चाहिए। प्रत्यक्ष रूप से चुनाव होने से छात्रों को शक्तियां मिलेगी। छात्र समस्याओं को जोरदार ढंग से उठाया जा सकेगा। छात्र संघ की सिफारिश से ही 1976 में विद्यार्थियों को तीन माह का बस पास के लिए मात्र नौ टिकट का किराया देना पड़ता था। इसके अलावा बढ़ी हुई फीस कम कराने व अन्य छात्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए विवि प्रशासन पर दबाव बनाया जाता था। ---हम इसलिए चाहते हैं छात्र संघ चुनाव : प्रदीप देशवाल इनसो के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल का कहना है कि हमारा उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों के लिए माहौल तैयार करना है, जो आखिरी पंक्ति में हैं। उनके लिए अच्छे हॉस्टल हों, लाइब्रेरी, कॉलेज हों। उन्हें अभिव्यक्ति का अधिकार मिले। शिक्षा का अधिकार मिले। नौजवान को बोलने की, कंटेस्ट करने की ताकत मिलनी चाहिए। उनमें लीडरशिप क्वालिटी तैयार करना चाहते हैं। --हरियाणा की छात्र राजनीति ने पैदा किए कई नेता छात्र राजनीति ने कई बड़े नेताओं को जन्म दिया है। इनमें पूर्व मंत्री देवेंद्र शर्मा, निर्मल ¨सह, पृथ्वी ¨सह, सीपीएम नेता इंद्रजीत ¨सह, पूर्व सांसद अजय चौटाला, पूर्व सीपीएस राव दान ¨सह, पूर्व मंत्री एवं विधायक कर्ण ¨सह दलाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर, सांसद दुष्यंत चौटाला, छात्र नेता संपूर्ण, बलवान सुहाग, परमजीत तहलान ¨सह शामिल हैं।

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