जागरण संवाददाता, रोहतक : रोहतक जिले में बुधवार रात को हुई बरसात किसानों के लिए राहत लाई है। करीब 16 एमएम बरसात से फसलों को भरपूर फायदा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के लिए अनुकूल समय बना है। जिले भर में करीब 44000 हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल की खेती की जाती है। बरसात होने तक करीब 15000 हेक्टेयर भूमि पर ही रोपाई हो पाई थी। इस बरसात के बाद बची हुई 29000 हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई अच्छे से हो सकेगी।

धान की फसल के लिए पानी की अधिक मात्रा की जरूरत होती है। बरसात होने से किसानों की आर्थिक मदद भी हो जाती है। बरसात के अभाव में नहरी व ट्यूबवेल के पानी के भरोसे रहना पड़ता है। जिले के कृषि विभाग के उप निदेशक रोहताश सिंह ने बताया कि यह बरसात फसलों के लिए लाभदायक है। धान, ज्वार, बाजरा की रोपाई के लिए उपयुक्त समय है। वहीं कपास व गन्ना की रोपाई हो चुकी है, इस बरसात में इन फसलों को भी फायदा मिलेगा। फसलों को एक सप्ताह के अंतराल में अगस्त के अंत तक इस तरह की बरसात की अभी जरूरत है। बाजरा के लिए आदर्श तापमान 35 डिग्री

बरसात से पारा भी लुढ़का गया है। बृहस्पतिवार को अधिकमत तापमान 35 डिग्री सेल्सियस व न्यून्तम 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तापमान बाजरा की फसल के लिए आदर्श माना जाता है। वहीं धान के लिए 40 से 42 डिग्री तक तापमान होना चाहिए। गन्ने की बुवाई-रोपाई फरवरी और अक्टूबर माह में होती है। अभी फरवरी माह की रोपाई वाली फसल खेतों में खड़ी है। बरसात से इस फसल को भी फायदा मिला है। कपास की फसल की बुवाई अप्रैल से मई के दूसरे सप्ताह तक हो चुकी है। अच्छे मानसून की स्थिति में फसलों के लिए फायदा हो सकता है। क्षेत्र बरसात (मिमी में)

- रोहतक 27 मिमी

- महम 20 मिमी

- सांपला 08 मिमी

- कलानौर 10 मिमी फसलों का यह है इस बार लक्ष्य ::: फसल : लक्ष्य : बुआई/रोपाई

1. धान : 45 हजार हेक्टेयर : 15 हजार हेक्टेयर तक हो चुकी है

2. बाजरा : 20 हजार हेक्टेयर : अब होगी

3. कपास : 18 हजार हेक्टेयर : 15258 हेक्टेयर

4. गन्ना : 11 हजार हेक्टेयर : 11 हजार हेक्टेयर

स्त्रोत : कृषि विभाग

Posted By: Jagran

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