जागरण संवाददाता, रोहतक:

हरियाणा अभिलेखागार विभाग क्षेत्रीय मंडल की ओर से मंगलवार को दो दिवसीय दुर्लभ एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों और फोटोग्राफ की प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। दो-दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्राचार्या पूनम भनवाला, अभिलेखागार विभाग के सहायक निदेशक रणबीर मान, मनोज सिधु अभिलेखपाल और मंगल के द्वारा प्रदर्शनी प्रदर्शित की गई। इतिहास विषय की एसोसिएट प्रोफेसर मीनू नैन ने इतिहास व अन्य विषयों के छात्राओं को प्रदर्शनी में प्रदर्शित अभिलेखों का दौरा करवाया।

इस प्रदर्षनी में 1857 में रोहतक की भूमिका, लाला हुकुमचंद जैन व मिर्जा मुनिर बेग, हांसी, नवाब बहादुरगढ़ जंग खां, बहादुरगढ़, बल्लवगढ़ के राजा नाहर सिंह को चांदनी चौक में फांसी से संबंधित भी दस्तावेज यहां उपलब्ध रहे। राव किशन गोपाल, नांगल पठानी और 1857 में अंबाला जिले की घटनाएं। नवाब अब्दुर्रहमान खां झज्जर के अलावा 1942 में चौधरी देवीलाल की जेल यात्राएं भी इन दुर्लभ अभिलेखों में शामिल हैं। बलिदानी भगत सिंह की मौत का फरमान हो या फिर नेता जी सुभाष चंद बोस की 1941 से पहले की फोटोग्राफ। रोहतक जिले के 1857 के क्रांतिकारियों के नाम, ग्राम और सजा सहित सूची जिनको फांसी दी गई या गोली से से उड़ा दिया गया, उनका भी पूरा विवरण प्रदर्शनी में दिया गया है। पुराने रोहतक जिले के आजाद हिद फौज की सूची फोटोग्राफ एवं उनका संक्षिप्त परिचय। रोल्ट एक्ट के विरोध में चौधरी टेकराम खिड़वाली की गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेज प्रदर्शनी में लगे हैं। प्राचार्य ने बताया कि यह प्रदर्शनी आम जनता और विशेषकर छात्र-छात्राओं के लिए रूचिकर व प्रेरणादायक सिद्ध होगी। टेकराम से इतने डर गए थे अंग्रेज, करा दी थी हत्या

खिडवाली के टेकराम ने रोल्ट एक्ट का विरोध किया था। अंग्रेज सरकार ने जेल भेज दिया था। कुछ दिनों बाद जेल से आए। यह भी बताते हैं कि बाद में अंग्रेज सरकार ने हत्या करा दी थी। क्योंकि अंग्रेज इनके बहुत डरते थे। इसलिए गिरफ्तारी भी गांव से कई किमी की थी। दरअसल, देश को आजाद कराने वालों में टेकराम का नाम अग्रणी था, अंग्रेजों को डर था कि यदि टेकराम को छोड़ दिया गया तो विद्रोह हो सकता है। हालांकि गिरफ्तारी तक के दस्तावेज उपलब्ध हैं, हत्या कैसे और किस तरह हुई यह ब्योरा दस्तावेजों में नहीं है।

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