जागरण संवाददाता, रोहतक : किला रोड बाजार के दुकानदारों की समस्याएं दूर नहीं हो रहीं हैं। हालात यह हैं कि बरसात वाले दिन यहां तीन फीट सड़क पर जलजमाव हो गया। जबकि सोमवार को दुकानों के आगे सीवरेज ओवरफ्लो हो गया। दूषित पानी का जमाव सड़क और दुकानों के आगे हो गया है। इससे ग्राहकों और दुकानदारों को दुर्गंध वाले दूषित पानी के बीच से निकलना पड़ा।

व्यापारियों का दावा है कि अधिकारियों से बार-बार शिकायत की, लेकिन शाम तक सीवरेज ओवरफ्लो से राहत नहीं मिली। किला रोड के लोगों को तीन साल बाद भी सीवरेज ओवरफ्लो से राहत नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। किला रोड बाजार एसोसिएशन के प्रधान विट्टू सचदेवा ने बताया कि पिछले 15 दिनों से किला रोड बाजार की मुख्य सड़क पर सीवरेज का दूषित पानी बह रहा था। कुछ दिन राहत मिली। अब बरसात के बाद से फिर से सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या है। इन्होंने नाराजगी जताई कि यहां करीब 700 से अधिक दुकानों-प्रतिष्ठानों के अंदर तक दूषित पानी के जल जमाव से बेहाल हैं। नाले की गहराई व चौड़ाई कर दी कम, इसलिए परेशानी

प्रधान विट्टू सचदेवा, गुलशन बतरा, विशंभर आहूजा, रमेश गांधी, ललित सुनेजा, सुनील, गुलशन चौधरी, गोपालदास आदि ने बताया कि पहले यहां नाले की गहराई करीब तीन फीट और गहराई भी इतनी ही थी। नया नाला बनाया गया तो चौड़ाई और गहराई घटकर महज एक-डेढ़ फीट ही रह गई। इसलिए पानी का जमाव हो जाता है। सीवरेज ओवरफ्लो से निपटने यहां नई लाइन बिछाई जाए। मशीनों से सफाई कराई जाए। तभी इस समस्या से स्थाई तौर से राहत मिल सकती है। गलियों में भी जीटी टूटी पड़ीं

रोहतक के किला रोड के निकट कालोनियों के लोगों को भी परेशानी होती है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बार-बार सीवरेज ओवरफ्लो के साथ ही बीच सड़क पर रखे डिवाइडर रखे हैं। इससे भी परेशानी है। बरसाती पानी भी इसी कारण भर गया था। प्रधान सचदेवा कहते हैं कि बाजार के निकट कालोनियों की गलियों में सीवरेज की लाइन भी ओवरफ्लो हैं। मुख्य सड़क टूटी पड़ी है। इसके साथ ही बरसाती पानी की निकासी की जीटी मिट्टी से भरी हुई हैं, इसलिए भी परेशानी है। हादसे से अधिकारियों ने नहीं लिया सबक

करीब पांच साल पहले एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाते समय निधन हो गया। तभी से स्थानीय लोगों ने किला रोड बाजार को वाहन मुक्त करने की मांग की गई थी। चार साल पहले किला रोड को वाहन मुक्त करने और सुंदरीकरण की योजना के तहत 40 लाख सड़क के निर्माण में खर्च किए। 40 लाख का नाला निर्मित हुआ। स्ट्रीट लाइट लगाने पर अलग से खर्चा हुआ। फिर भी बाजार में सुंदरीकरण से लेकर जाममुक्त जैसी व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।

Edited By: Jagran