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रोहतक, जेएनएन। कांग्रेस को अब हरियाणा में जल्‍द बड़ा झटका लगने वाला है और पार्टी यहां टूट के एकदम नजदीक दिख रही है। यह रविवार को ही तय लग रहा था, लेकिन पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से बातचीत के बाद इसे टाल दिया। कांग्रेस हाईकमान से प्रदेश नेतृत्व को लेकर लड़ाई लड़ रहे हुड्डा की रणनीति रातों-रात बदल गई। लेकिन जिस अंदाज में वह हमलावर रहे वह कांग्रेस नेतृत्‍व को बेचैन करने के लिए काफी है। हुड्डा ने नई पार्टी या मंच का ऐलान नहीं, लेकिन अगली सियासी राह तय करने के जिए 25 सदस्‍यीय कमेटी गठिेत कर अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी। अब सारा कुछ कांग्रेस आलाकमान पर निर्भर है। यदि हुड्डा को हरियाणा कांग्रेस की कमान मिली तो हालात बदल सकते हैं। पूरे घटनाक्रम में बड़ा सवाल है कि दबाव में हुड्डा हैं या कांग्रेस। हुड्डा के लिए सबसे बड़ी परेशानी तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्‍व द्वारा उनको अधिक तव्‍वजो नहीं दिया जाना है।

हुड्डा बोले- कमेटी कहेगी तो राजनीति छोड़ दो उसे भी मानूंगा

सोमवार को दिल्‍ली में हुड्डा ने कहा कि उनकी आगे की सियासत के बारे में 25 सदस्‍यीय समिति ही तय करेगी। एक-दो दिन में इस कमेटी का गठन कर दिया जाएगा। इसके सदस्य चुनने के लिए बैठक आयोजित की जाएगी। हुड्डा ने कहा, यह कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी और उसके हिसाब से मेरा अगला कदम होगा। अगर कमेटी कहेगी कि राजनीति ही छोड़ दो, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। बता दें कि हुड्डा ने रविवार को रोहतक में आयोजित महा परिवर्तन रैली में कहा था कि आगे सियासी कदम उठाने के बारे में फैसला करने के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी का ऐलान वह जल्‍द ही चंडीगढ़ में बैठक कर करेंगे।

 25 सदस्‍यीय कमेटी तय करेगी भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगली सियासी राह

राेहतक रैली में हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस पहले वाली नहीं रही और अब भटक गई है। वह बोले, मैं सारे बंधनों से मुक्‍त होकर अपनी बात कहने आया हूं। हरियाणा में कांग्रेस से अलग होने का साफ संकेे‍त देते हुए वह यह भी बाेले कि अब खुद को अतीत से मुक्‍त करता हूं। इसी तरह उन्‍होंने जम्मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 को हटाने के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख को गलत बताकर उन्‍हें पार्टी को कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्‍होंने जम्मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 हटाने की चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस राह भटक गई है। अब ऐसे में हालात को संभालना कांग्रेस नेतृत्‍व के लिए कतई आसान नहीं होगा।

सोनिया गांधी से बातचीत के बाद रातों-रात बदली भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रणनीति

बताया जाता है कि हुड्डा द्वारा रोहतक की महापरिवर्तन रैली में अलग पार्टी या मंच की घोषणा की काफी संभावना थी, लेकिन शनिवार देर रात सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद उन्‍होंने अपनी रणनीति बदल दी। इसीब बातचीत के कारण उन्होंने न तो नई पार्टी का ऐलान किया और न ही कांग्रेस को छोड़ा या कोई मंच बनाया। ऐसे में हरियाणा की राजनीति में बड़े धमाके की उम्मीद कर रहे हुड्डा समर्थकों को अब कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। रैली में हुड्डा ने अंदाज व तेवर से अपने इरादे जरूर जाहिर कर दिए।

परिवर्तन महारैली से पूर्व भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाने और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के निशान पर हरियाणा में विधानसभा चुनाव लडऩे के संकेत मिल रहे थे। हुड्डा के साथी विधायक और उनके खासमखास पूर्व मंत्री व विधायक भी मीडिया के सामने बड़े परिवर्तन और धमाके के बयान लगातार दे रहे थे।

रणनीति बदलने का कारण

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की शनिवार रात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया से बातचीत हुई। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने हुड्डा को सकारात्मक आश्वासन दिया था। हुड्डा हरियाणा में दस साल तक मुख्यमंत्री रहे, इसका पूरा श्रेय सोनिया गांधी को ही जाता है। सोनिया गांधी और हुड्डा के बीच संबंध बेहतर हैं। सोनिया से फोन पर बातचीत के बाद हुड्डा ने रैली को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव किया। इसका उदाहरण है कि मंच के पीछे परिवर्तन रैली का बैकड्राप भी नहीं लगाया गया था।

पंडाल में नहीं थे कांग्रेस के झंडे और न बड़े नेताओं के फोटो

हुड्डा और उनके समर्थकों के रुख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवर्तन महारैली के पंडाल में न तो कांग्रेस के झंडे थे और न ही सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी या किसी बड़े नेता के फोटो , होर्डिंग या बैनर लगाए गए थे। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद के फोटो नहीं होना, कांग्रेस से सीधे तौर पर नाराजगी दिखा रहे थे। नेताओं और कार्यकर्ताओं के सिर पर गुलाबी पगड़ी ही नजर आ रही थी। 4 अगस्त को कार्यकर्ता सम्मेलन में जो नेता मंच पर थे, रैली में भी अधिकतर वही नेता थे। कोई बड़ा नेता न तो नदारद रहा और न ही कोई शामिल हुआ।

हुड्डा ने अनुच्‍छेद 370 पर ऐसे घेरा

हुड्डा ने रोहतक रैली में कहा, मैं 72 साल का हो गया हूं और रिटायर होना चाहता था, लेकिन हरियाणा की हालत देखकर संघर्ष का फैसला किया। उन्‍हाेंने कहा कि देशहित से ऊपर कुछ नहीं। जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद हटाने का हमारे कई नेताओं ने विरोध किया, यह सही नहीं था। मैंने देशहि‍त के इस निर्णय का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा, मेरे परिवार की चार पीढि़यों कांग्रेस से जुड़ी रही है। हमने कांग्रेस के लिए जी जान से मेहनत की, लेकिन अब कांग्रेस पहले वाली नहीं रही। 370 पर कांग्रेस कुछ भटक गई, लेकिन देशभक्ति और स्वाभिमान का मैं किसी से समझौता नहीं करूंगा, इसीलिए मैंने 370 हटाने का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा, उसूलों के लिए टकराना भी जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा दिखना जरूरी है।

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अगला कदम उठाने तक समानांतर कांग्रेस चलाएंगे हुड्डा, सोनिया जल्द बुलाएंगी बैठक

अब पूरे घटनाक्रम के बीच तय है कि हुड्डा अपने अगले फैसले तक कांग्रेस में रहकर समानांतर कांग्रेस चलाएंगे। प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद से मुलाकात और सोनिया गांधी से बातचीत के बाद हुड्डा ने अलग पार्टी बनाने का फैसला फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब 25 सदस्यीय कमेटी के अलग पार्टी बनाने या कांग्रेस में रहने का फैसला लेने तक हुड्डा हरियाणा में समानांतर कांग्रेस चलाएंगे। उधर, पार्टी सूत्रों के अनुसार सोनिया गांधी जल्द ही हरियाणा के मसले को लेकर पार्टी नेताओं की बैठक बुला सकती हैं।

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रोहतक की परिवर्तन रैली में मंच पर 13 विधायकों और 70 पूर्व मंत्री-विधायकों और पूर्व सांसद पहुंचे थे। इससे हुड्डा ने कांग्रेस हाईकमान में यह संदेश देने की कोशिश की कि असली कांग्रेस उनके साथ है। हुड्डा द्वारा गठित 25 सदस्यीय कमेटी में वह सदस्य हैं जो उनके थिंक टैंक माने जाते हैं।

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बता दें कि हुड्डा और उनके समर्थक लंबे समय से मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाकर प्रदेश कांग्रेस की बागडोर अपने हाथों में सौंपे जाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर कई नेता हुड्डा के समर्थक हैं। ये नेता नहीं चाहते कि हुड्डा कांग्रेस छोड़ें। लेकिन अपनी राजनीतिक पारी को जोशीले अंदाज में खेलना चाह रहे हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए भी जगह बनाना चाहते हैं। पूरे घटनाक्रम में अब हुड्डा समर्थकों की निगाह उनके अगले कदम और 25 सदस्यीय कमेटी के निर्णय पर टिक गई है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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