जागरण संवाददाता, रोहतक :

निजी स्कूल बसों की जांच अभियान के दूसरे चरण में शनिवार को आरटीए ने कन्हेली स्थित पा¨सग सेंटर में सात स्कूलों की 105 बसों की जांच की। जांच के दौरान अधिकतर बसों में जीपीएस और कैमरे सहित सुरक्षा के तमाम इंतजाम नहीं मिले। जिन स्कूलों की बसों में खामियां पाई गई उन संचालकों को आरटीए ने एक सप्ताह का समय देकर छोड़ दिया।

जिले में एक हजार के करीब स्कूली बसें हैं। सुरक्षा और अच्छी व्यवस्था के नाम पर अभिभावकों से फीस के नाम पर ज्यादा पैसे वसूलने के बाद भी निजी स्कूल संचालक नौनिहालों की ¨जदगी से खिलवाड़ कर रहे है। स्कूली बसें परिवहन विभाग के नियमों में धज्जियां उड़ा रही हैं। अधिकांश स्कूली बसों में परिवहन विभाग के द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन नहीं हो रहा है। इसलिए आरटीए ने जिला के सभी निजी स्कूलों की बसों की जांच का अभियान शुरू किया है। जिसका शनिवार को दूसरा चरण रहा। इससे पहले महम में स्कूली बसों की जांच के दौरान 65 बसों में खामियां पाई गई थी। अभियान तीसरा चरण 18 अगस्त को है।

जांच के दौरान बसों में यह पाई गई खामियां

जांच के दौरान 25 स्कूली बसों में कैमरे और जीपीएस खराब पड़े मिले, किसी भी बस में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं थी, कई बस चालकों के पास हेवी वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था, बसों में सुरक्षा संबंधी नंबर नहीं लिखे थे। ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर विनय ने बताया कि खामियां पाई गई स्कूली बसों के संचालकों को एक सप्ताह तक खामियां दूर करने का समय दिया गया है। उसके बाद दोबारा से बसों की जांच की जाएगी। जिस दौरान खामियां पाई जाने वाली बसों का चालान काटा जाएगा।

Posted By: Jagran