जागरण संवाददाता, रोहतक : स्पाइनल कॉर्ड में चोट ज्यादातर दुर्घटनाओं की वजह से लगती हैं, जिनसे सावधानी बरत कर बचाव किया जा सकता है। यह बात पंडित भगवत शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डा. ओपी कालरा ने कही। वे बुधवार को विश्वविद्यालय के फिजियोथैरेपी कालेज की ओर से मनाए गए स्पाइनल कॉर्ड इंज्युरी डे कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस दौरान लोगों को नुक्कड़ नाटक, पोस्टरों और जागरूकता रैली के माध्यम से जागरूक किया गया। वहीं, स्पाइन की चोट से बचाव के तरीके भी बताए गए।

इससे पहले प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कुलपति डॉ. कालरा ने कहा कि आमजन को विभिन्न बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए समय-समय पर पोस्टर प्रदर्शनी आयोजित करनी चाहिए, ताकि आमजन को लाभ हो। फिजियोथैरेपी कालेज के प्राचार्य डा. रूप ¨सह ने बताया कि लोगों को स्पाइनल कॉर्ड इंज्युरी के प्रति जागरूक करने के लिए छात्रों ने चौधरी रणबीर ¨सह ओपीडी में एक नुक्कड़ नाटक आयोजित किया, जिसके बाद ओपीडी से ट्रॉमा सेंटर से होते हुए निदेशक कार्यालय तक एक जागरूकता रैली निकाली गई। डा. रूप ¨सह ने बताया कि रीढ़ की हड्डी की चोटों का इलाज संभव है जोकि संस्थान में उपलब्ध है। इस अवसर पर डीन डा. सरिता मग्गू, डीएमएस डा. सुखबीर, डा. अनिल कौशिक, डा. भावना, डा. ¨डपल, डा. गीतांजलि सिक्का, डा. पूनम, डा. विक्रम ¨सह, औंकार नाथ मौर्या आदि मौजूद रहे। ये बरतें सावधानी :

डॉ. रूप ¨सह ने कहा कि शराब पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए, तैराकी करने के लिए पानी में कूदने से पहले पानी की गहराई जांच लेनी चाहिए, सिर के बल पानी में न कूदे, शराब व किसी अन्य पदार्थ के नशा करने के बाद तैराकी न करें, अधिक स्पीड में गाड़ी नहीं चलानी चाहिए, बिना सीट बेल्ट के गाड़ी नहीं चलानी चाहिए, बुजुर्गो के लिए बाथरूम में रे¨लग लगवानी चाहिए, खेती में मशीनरी का कार्य करते हुए ज्यादा ढीले कपड़े व शॉल का प्रयोग नहीं करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि रीढ़ की हड्डी चोट ग्रस्त मरीज की करवट बार-बार बदलने के साथ-साथ साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना चाहिए। मरीज को खूब प्रोटीन जैसे पनीर, सोयाबीन, हरी सब्जी, अंडायुक्त पौष्टिक भोजन खाना चाहिए।

Posted By: Jagran