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जागरण संवाददाता, रोहतक : पीजीआइ में डाक्टरों के इलाज से असंतुष्ट युवक धौंस जमाने के लिए फर्जी एएसपी बनकर पहुंचा था। जांच में सामने आने पर पीजीआइ थाना पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में यह खुलासा किया है। आरोपित पंजाब में नट-बोल्ट की फैक्ट्री चलाता है और उसके पिता रिटायर्ड प्रोफेसर है। फिलहाल आरोपित से पूछताछ जारी है।

पीजीआइ थाना प्रभारी कैलाश चंद्र ने बताया कि 29 मई को एक युवक ट्रामा सेंटर में पहुंचा था, जिसके साथ पुलिस की वर्दी में एक सिपाही भी था। सादी वर्दी पहने युवक ने सीएमओ ऑफिस में मौजूद डा. कीर्ति शर्मा से कहा कि वह एएसपी है और चुनाव आयोग द्वारा ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। उसने रिकार्ड चेक करने के लिए कहा और डा. को धमकी दी कि अच्छे से काम नहीं किया तो सस्पेंड करा दूंगा। इसके बाद युवक रेडियोलॉजिस्ट विभाग में पहुंचा। वहां पर डा. जितेंद्र को मशीन चेक करने के लिए कहा। शक होने पर डाक्टर ने युवक से उसका आइडी कार्ड मांगा, जिस पर युवक ने डाक्टर को धमकी दी और सिपाही के साथ बाहर चला गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में आरोपित की पहचान सेक्टर-3 निवासी रूपांकर के रूप में हुई। आरोपित पंजाब में नट-बोल्ट की फैक्ट्री चलाता है। आरोपित का पिता रिटायर्ड प्रोफेसर है। सोमवार को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर पूछताछ की। इसमें सामने आया कि आरोपित का करीब एक महीने पहले एक्सीडेंट हो गया था। जिसमें उसे टांके आए थे। पीजीआइ में उसका इलाज चल रहा था। डाक्टरों के इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर उसने धौंस जमाने के लिए खुद को एएसपी बताया था। आरोपित के साथ में जो सिपाही गया था वह सेक्टर-14 की पुलिस चौकी में तैनात था। मामला संज्ञान में आने पर आरोपित सिपाही प्रवीण को उसी समय निलंबित कर दिया था। जिसकी खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है। आरोपित सिपाही तभी से फरार चल रहा है।

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Posted By: Jagran

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