जागरण संवाददाता, रोहतक : जागरूक जनता लोकतंत्र को मजबूत करती है। आरटीआइ (राइट टू इंफोरमेशन) एक्टिविस्ट अमित चौधरी पिछले 13 सालों से लोगों को सूचना के अधिकार के प्रति जागरूक कर रहे हैं। एक हजार से ज्यादा लोगों की मदद कर चुके हैं। करनाल के एक कालेज में इतिहास के प्रोफेसर अमित का कहना है कि आजादी के आरटीआइ सबसे बड़ा अधिकार है।

रोहतक के सेक्टर-2 में अपने निवास स्थान से साल 2007 में आरटीआइ एक्टिविस्ट के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि एक्ट को पूरी तरह से समझने के बाद इसकी महत्ता का पता चला। अधिकारियों का आमजन के प्रति'तू कौन होता है पूछने वाला'रवैये के प्रति आरटीआइ कुठाराघात करता है। आरटीआइ, आमजन के साथ ही अधिकारियों को भी लोकतांत्रिक बनाती है। पेंशन में गड़बड़ी, गैस सिलेंडर की कॉपी, लाइसेंस नहीं बनने, भीम अवार्ड के लिए सिलेक्शन में गड़बड़ियों को आरटीआइ लगाकर अमित उजागर कर चुके हैं। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में शिक्षक आंदोलन के दौरान हटाए गए रिटायर्ड प्रोफेसर वीबी अबरोल की पेंशन रिविजन अप्लीकेशन में सूचना के अधिकार ने बड़ी मदद की। प्रो. अबरोल ने अमित चौधरी की मदद से आरटीआइ लगाई। जिसके बाद उन्हें एमडीयू में अप्वाइंटमेंट का लेटर मिला। उनकी पेंशन रिविजन अप्लीकेशन स्वीकार हो गई। प्रतिवर्ष औसतन 100 लोगों की मदद कर रहे

अमित ने बताया कि औसतन 100 लोगों की मदद प्रतिवर्ष कर रहे हैं। आरटीआइ लगाने की प्रक्रिया जानने के साथ ही लोग अन्य तरह की मदद के लिए आते हैं।

Posted By: Jagran

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