हरियाणा की पंचायत ने लव मैरिज करने पर परिवार का बंद किया था हुक्का-पानी, हाई कोर्ट ने DC और महिला सरपंच को किया तलब
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लाखन माजरा में एक परिवार के कथित सामाजिक बहिष्कार और जुर्माना लगाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
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हाई कोर्ट ने DC और सरपंच को किया तलब। सांकेतिक फोटो
HighLights
परिवार के सामाजिक बहिष्कार पर हाईकोर्ट सख्त हुआ।
रोहतक डीसी, सरपंच को व्यक्तिगत पेशी का आदेश।
पंचायत के प्रस्ताव की वैधता पर उठे सवाल।
जागरण संवाददाता, रोहतक। लाखन माजरा में एक परिवार का कथित सामाजिक बहिष्कार करने और उसके साथ संबंध रखने वालों पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के लिखित प्रस्ताव का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता संदीप की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता को अपना पक्ष रखने के लिए निर्देश लेने का समय दिया है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर तय करते हुए रोहतक के डीसी और गांव की महिला सरपंच को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। इससे अब मामले में प्रशासन और पंचायत की भूमिका पर अदालत के सामने स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ गया है। याचिका में मुख्य सवाल केवल पंचायत के एक प्रस्ताव तक सीमित नहीं है।
इसमें यह मुद्दा भी उठाया गया है कि क्या किसी पंचायत को किसी परिवार के सामाजिक संबंध खत्म करने का फरमान जारी करने और उससे संपर्क रखने वालों पर आर्थिक दंड लगाने का अधिकार है। याचिकाकर्ता ने प्रस्ताव की प्रक्रिया और प्रशासन के स्तर पर की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
15 फरवरी 2023 के प्रस्ताव को चुनौती
याचिकाकर्ता के अनुसार, ग्राम पंचायत लाखन माजरा में 15 फरवरी 2023 को एक प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें संदीप और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने यानी उनका हुक्का-पानी बंद करने की बात कही गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि परिवार के साथ संबंध बनाए रखने वाले लोगों पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की बात प्रस्ताव में शामिल थी।
संदीप ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए इसकी वैधता और इसे पारित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि पंचायत की बैठक के लिए उचित सूचना नहीं दी गई थी और बैठक में आवश्यक कोरम से संबंधित नियमों का पालन भी नहीं हुआ।
प्रशासन को शिकायतें देने के बाद अदालत पहुंचे
याचिका के अनुसार, संदीप ने मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए 7 मई 2026 को रोहतक के डीसी को शिकायत दी थी। इसके बाद 29 जुलाई 2026 को आयुक्त के समक्ष भी शिकायत रखी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन शिकायतों के बावजूद उसे अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।
इसी आधार पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले की जांच और संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की। अदालत में सुनवाई 14 अक्टूबर को होनी है।
