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रोहतक में टीबी से 8 साल के बच्चे की मौत, एक साल पहले बहन की भी गई थी जान

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:40 PM (IST)

रोहतक के पीजीआईएमएस में आठ वर्षीय नोनी की टीबी से मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।

पीजीआईएमएस में आठ साल के बच्चे की टीबी से मौत।

पीजीआईएमएस में आठ साल के बच्चे की टीबी से मौत।

HighLights

  1. आठ वर्षीय नोनी की पीजीआईएमएस रोहतक में टीबी से मौत

  2. पिछले साल चार माह की बहन की भी टीबी से हुई थी मृत्यु

  3. पिता ने अन्य बच्चों की टीबी जांच की मांग की

जागरण संवाददाता, रोहतक। पीजीआईएमएस में टीबी से एक आठ वर्षीय बच्चे नोनी की मौत हो गई है। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराकर स्वजन को सौंप दिया है। वहीं उसके पिता ने बताया कि पिछले साल रक्षा बंधन पर उनकी चार महीने की बेटी की टीबी से ही मौत हो गई थी।

जिसके बाद से उनका बेटा भी बीमार चल रहा था। ऐसे में उनके दो बच्चों को टीबी ने निगल लिया। दरअसल, राजीव नगर कन्हेली रोड स्थित एकता कॉलोनी निवासी अनिल ने बताया कि उनके बेटे नोनी को टीबी थी। इसके चलते उसका इलाज पीजीआईएमएस के वार्ड 14 में दो महीने से चल रहा था।

टीबी की बीमारी की वजह से उसे काफी कमजोरी आ गई थी। इसके चलते वह चल फिर भी नहीं पा रहा था और चारपाई पर ही बैठा रहता था। 9 सितंबर को नोनी घर पर था। ज्यादा कमजोरी आने के कारण वह चाय के कटोरे पर गिर गया।

इससे उसके हाथ और छाती जल गई। इसके बाद उसे पीजीआईएमएस में भर्ती कराया गया। जहां अधिक कमजोरी और टीबी के कारण इलाज के दौरान 13 सितंबर यानी सोमवार को उसकी मौत हो गई।

चार महीने की बहन से हुई थी टीबी

अनिल ने बताया कि उनकी पत्नी ने पिछले साल एक बच्ची को जन्म दिया था। जब वह चार माह की हुई तो उसे टीबी हो गई। जिससे उसकी मौत हो गई। उससे ही नोनी को टीबी लगी थी। जिसके चलते वह बीमार रहने लगा था। अब उसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि चलना फिरना भी मुश्किल हो गया था। टीबी ने उनके दो बच्चों की मौत हो गई।

शिवाजी कॉलोनी थाना पुलिस ने सीएमओ को भेजी रिपोर्ट

वहीं सूचना पर शिवाजी कॉलोनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की एक रिपोर्ट बनाकर सीएमओ कार्यालय में मंगलवार को भेज दी है। इसके साथ ही पिता के बयान के आधार पर पोस्टमार्टम कराया गया और फिर स्वजनों को सौंप दिया गया।

पांच बच्चों के पिता है अनिल

अनिल ने बताया कि वह पेंटर का काम करते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर जिले के रहने वाले है। पिछले 35 साल से शिवाजी कॉलोनी थाना क्षेत्र की एकता कॉलोनी में रह रहे हैं। उनके पांच लड़के है। इनमें से नोनी की मौत 13 सितंबर को दोपहर तीन बजे हो गई। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को उनके चारों बच्चों की टीबी की जांच करनी चाहिए। ताकि, यह बीमारी उनमें न फैले।

एक मरीज 10 से 15 लोगों को कर सकता है संक्रमित

डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी टीबी के मरीज ने अपना इलाज शुरू नहीं कराया है तो वह एक व्यक्ति अपने संपर्क में आने वाले 10 से 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। यही कारण है कि विभाग अब हाई रिस्क क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रख रहा है और इन इलाकों में जाकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

2,111 हाईरिस्क गांवों और शहरी वार्डों को किया जा चुका है चिन्हित

प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मरीजों की पहचान की जा रही है। प्रदेश में अब तक 2,111 हाइरिस्क गांवों और शहरी वार्डों को चिन्हित किया गया है, जहां पर टीबी के मरीज मिलने की संभावना ज्यादा है। प्रदेश में करीब 3,2419 टीबी के मरीज है।