केएस मोबिन, रोहतक

पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परर्फोमिग एंड विजुअल आर्ट (पीएलसी सुपवा), यहां के विद्यार्थियों की क्रिएटिव कार्य के साथ ही अपने अनोखे आर्किटेक्चर के लिए भी लोकप्रिय है। लाल बलुआ और अन्य दुर्लभ पत्थरों से तैयार इमारत एक नजर में ही दिलो-दिमाग में उतर जाती है। कम ही लोगों को पता है कि पार्लियामेंट लाइब्रेरी, प्रगति मैदान के हॉल ऑफ नेशन्स, एशियाड खेल गांव, इंडियन एंबेसी, बीजिग जैसी इमारतों के आर्किटेक्ट राज रेवाल ने पीएलसी सुपवा का डिजाइन तैयार किया था।

वर्तमान में यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त कर चुके पीएलसी सुपवा की शुरुआत वर्ष 2011 में एशिया के पहले इंटीग्रेटेड कैंपस के रूप में हुई थी। स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, स्टेट इंस्टीट्यट ऑफ फाइन आ‌र्ट्स, स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन और स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन प्लानिग एंड आर्किटेक्चर जैसे संस्थान एक ही इंटेग्रेटेड कैंपस में संचालित किए गए। वर्ष 2014 में विवि का दर्जा मिलने पर चारों ऑटोमन्स इंस्टीट्यूट फैकल्टी में तब्दील हो गए। विवि का फिल्म एंड टेलीविजन फैकल्टी (पूर्व में स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन) उत्तर भारत का पहला राजकीय फिल्म संस्थान था। सेक्टर-6 स्थित कैंपस करीब 22 एकड भूमि पर बनाया गया है। चारों इंस्टीट्यूट बनाने की शुरुआती कीमत 60 करोड़ तय की गई थी। विवि में आगामी सत्र तक फैकल्टी हाउस तैयार हो जाएंगे। वहीं ब्वायज हॉस्टल के लिए भी प्रयास हो रहे हैं।

म्यूजियम ऑफ प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया के डिजाइन से समानता

नई दिल्ली के तीन मूर्ति भवन के म्यूजियम ऑफ द प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया के प्रस्तावित डिजाइन को आर्किटेक्ट राज रेवाल ने पीएलसी सुपवा के डिजाइन से इंस्पायर बताया था। उन्होंने कहा कि सुपवा के सेंट्रल ऑडिटोरियम की छत और म्यूजियम के प्रस्तावित लाइब्रेरी ब्लॉक की छत का डिजाइन हूबहू मिलता है। हालांकि, म्यूजियम का डिजाइन तैयार करने वाले आर्किटेक्ट ने दोनों इमारतों के डिजाइन में समानता की बात का नकारा था।

सेंट्रल ऑडिटोरियम की छत से दिखती है शहर की स्काइलाइन

पीएलसी सुपवा के अर्बन प्लानिग एंड आर्किटेक्चर विभाग के लेक्चरर प्रदीप नाफेरिया ने बताया कि विवि के सेंट्रल ऑडिटोरियम की छत से रोहतक शहर की स्कलाइलाइन देखी जा सकती है। मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर आखिर तक की इमारत नजर आती है। कोरिडोर, रूम, लैब की डिजाइनिग ऐसी की पूरी तरह से हवादार रहते हैं। इमारत में बनाए पैटर्न, पिलर और बालकनी की शेडो (परछाई) सूरज की किरणों के साथ बदलती है। सौर उर्जा का प्रयोग इमारत को बनाता है इकोफ्रेंडली

विश्वविद्यालय के गुंबदनुमा सेंट्रल ऑडिटोरियम के टॉप पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। आर्किटेक्ट ने इमारत को इकोफ्रेंडली बनाने के लिए सोलर पैनल सेट करने के लिहाज से प्रत्येक इमारत पर जगह बनाई है। लेक्चरर प्रदीप का कहना है कि इमारत में अभी भी काफी जगहों पर सोलर पैनल सेट किए जाने हैं। प्रतिमाह औसतन 200 यूनिट तक बिजली सौर ऊर्जा से तैयार की जाती है। स्नातक और और स्नातकोत्तर के कोर्स हैं संचालित

पीएलसी सुपवा में स्नातक के साथ स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स संचालित हैं। सत्र 2021-22 से शॉर्ट टर्म सर्टीफिकेट व डिप्लोमा कोर्स भी संचालित किए जाने की योजना है।

Posted By: Jagran

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