जागरण संवाददाता, रोहतक : शहर में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने तमाम बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, नगर निगम प्रशासन ने प्रधानमंत्री आवासीय योजना में करीब 10156 आवेदन किए गए। इनमें से महज 1248 ही पात्रता सूची में शामिल हो सके। अभी दावे किए जा रहे हैं कि कड़ी शर्तो के चलते आवासीय योजना का लाभ पाने से वंचित हैं। वहीं, निगम के अधिकारियों ने दावा किया है कि शहरी क्षेत्र में नाममात्र के लिए ही जर्जर भवन हैं।

नगर निगम के जानकारों का कहना है कि यूं तो आवासीय योजना के लिए चार श्रेणियों में आवेदन किए गए थे। लेकिन एक श्रेणी में जर्जर भवनों की मरम्मत या फिर नए सिरे से निर्माण को लेकर रकम मिलती। लेकिन मालिकाना हक के साक्ष्य न होने या फिर अन्य कड़ी शर्तों के चलते योजना से तमाम लोग वंचित रह गए। यही कारण रहा कि अब लोग जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, पुराने शहर में भी तमाम कमर्शियल व रिहायशी इमारतें जर्जर हैं। निगम प्रशासन ने साल 2017 में भूकंप आने के बाद करीब 550 लोगों को नोटिस दिए थे। इसके बाद कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर जर्जर भवनों की निगरानी के लिए इसी साल जनवरी में तीन अधिकारियों की कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन परिणाम पहले जैसे ही रहे।

दावा, मकानों की मरम्मत के लिए भी रकम अटकी

हरियाणा वाल्मीकि महासभा के प्रधान राजेश वाल्मीकि ने बताया है कि गरीब परिवारों को जर्जर मकानों की मरम्मत के लिए 25 हजार रुपये तक मिलते हैं। लेकिन आंबेडकर कालोनी, कुंआ मुहल्ला, गढ़ी मुहल्ला व कलानौर क्षेत्र के कुछ गांवों के करीब 236 लोगों को योजना का लाभ नहीं मिला। बार-बार आ रहे भूकंप को लेकर कहा कि आवासीय योजना को सरल बनाया जाए, जिससे लोगों को राहत मिले।

एक्सपर्ट व्यू : भूकंपरोधी घर नहीं, हो सकता है बड़ा नुकसान : प्रदीप रंजन

लोक निर्माण विभाग के एसई प्रदीप रंजन का कहना है कि बार-बार आ रहे भूकंप के झटके चिता का कारण है। भूकंप रोधी इमारतें या घर टेबल के फ्रेम की तरह तैयार होते हैं। स्टील की सरियों के सहारे सबसे पहले मजबूत नींव के साथ पिलरों पर इमारत खड़ी की जाती है। इसके बाद निर्माणाधीन इमारत की दीवारें तैयार करते हैं। शहरी क्षेत्र में तमाम 40-50 साल पुराने घर, इमारतें भूकंप रोधी नहीं है। भूकंप आने की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है। यह भी बताया है कि भूकंपरोधी भवन, इमारत, घर को तैयार करने के लिए प्लाट का क्षेत्रफल, ऊंचाई, संबंधित क्षेत्र की जमीन आदि बिदुओं का ब्योरा तैयार किया जाता है। बड़ी इमारतों के लिए पायलिग यानी गहराई तक नींव रखी जाती है। जबकि छोटी इमारतों के लिए कम गहराई होती है। वर्जन

जो भी जर्जर भवन हैं उनके मालिकों को नोटिस दिलाएंगे। शहरी क्षेत्र में जो इमारतें हादसे का कारण बन सकती हैं इसके लिए जांच भी कराएंगे। पहले कोई कार्रवाई हुई कि नहीं इसकी मुझे जानकारी नहीं है।

मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम

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मेरी नजर में अब जर्जर भवन नहीं है। आवासीय योजना के लिए सरकार ने शर्तें तय की थीं। उन शर्तों पर खरे उतरने वालों के ही नाम सूची में शामिल किए गए थे।

जगदीश चंद्र, सिटी प्रोजेक्ट आफिसर, नगर निगम

Posted By: Jagran

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