जागरण संवाददाता, रोहतक :

नेशनल ही नहीं बल्कि ओलंपिक खेलों तक में मेडल जीतने की ललक रोहतक के खिलाड़ियों में साफ तौर पर देखी जा सकती है। इसी का नतीजा है कि जापान के टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए रोहतक के अमित पंघाल सहित दो खिलाड़ी क्वालिफाई कर चुके हैं। 2016 में हुए रियो ओलंपिक में रोहतक की महिला पहलवान साक्षी मलिक के कुश्ती में कांस्य पदक जीतने के बाद अब रोहतक के इन खिलाड़ियों से भी मेडल जीतने की उम्मीद है। रोहतक के मायना गांव निवासी अमित पंघाल 52 किलोग्राम भार में दुनिया के नंबर एक बॉक्सर हैं। वहीं, रोहित रोहतक के किलोई गांव के हैं और पैरा ओलंपिक खेलों में क्वालिफाई कर चुके हैं। उधर, प्रशिक्षकों का कहना है कि रोहतक सहित प्रदेश भर के खेल प्रतिभाओं के लिए बेहतर माहौल है और कड़ा अभ्यास भी कराया जाता है। जिसके चलते खिलाड़ी मेडल जीतकर लाते हैं। अमित में मेडल जीतने का है जुनून :

मायना गांव के अमित पंघाल 52 किलोग्राम भार वर्ग में दुनिया के नंबर एक बॉक्सर हैं और भारतीय सेना में जेसीओ के पद पर तैनात है। पिछले साल हुई व‌र्ल्ड बॉक्सिग चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर मेडल जीत कर देश का गौरवांवित किया था। जबकि उसी साल एशियन बॉक्सिग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इनके अलावा भी वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक मेडल अपने नाम कर चुके हैं। उनको मेडल जीतने का जुनून है। उनका लक्ष्य अब ओलंपिक खेलों में देश के लिए मेडल जीतना है। रोहित की हैं अनेक उपलब्धियां :

मूल रूप से रोहतक किलोई गांव निवासी पैरा एथलीट रोहित ने मार्च 2017 में ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में गोल्ड जबकि शाट पुट में सिल्वर मेडल जीता। उसी साल चीन में हुए जीपी ओपन पैरा एथलेटिक्स के डिस्कस थ्रो में उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया। जुलाई 2018 में बैंगलौर में हुई ऑल इंडिया ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डिस्कस थ्रो में उन्होंने फिर गोल्ड मेडल जीत कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 2019 में हुई नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड व सिल्वर मेडल जीते। रोहित जब करीब डेढ़ साल के थे तो उनकी दाई कलाई में दिक्कत हो गई थी। उनका यह हाथ तभी से दिव्यांग है। रोहित ने शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में क्वालिफाई किया है। ओलंपिक में मेडल जीतने का उनका लक्ष्य है। रोहतक सहित पूरे प्रदेश में खिलाड़ियों का बेहतरीन अभ्यास कराया जाता है। खिलाड़ियों में भी मेडल जीतने की ललक बनी रहती है। यहां का खान-पान भी बेहतर है। इसी कारण यहां के खिलाड़ी ओलंपिक तक में मेडल जीतने का माद्दा रखते हैं।

- ललिता, कार्यकारी जिला खेल अधिकारी, रोहतक ।

Posted By: Jagran

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