योग गुरु रामदेव ने देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में योग का पाठ पढ़ाया है। वर्तमान की दौड़भाग भरी जिंदगी में योग का महत्व बढ़ गया है। योग एक ऐसी पद्धति है जिससे तन के साथ मन भी स्वस्थ रहता है। ऐसे में जरूरी है कि शहर के लोग भी योग से अपने आपको तरोताजा रखें। लेकिन जरूरी है कि इसके लिए शहर में केंद्र बने। योग के महत्व को समझते हुए पीजीआइएमएस में दवा के साथ योग का केंद्र बनाया गया है। इसके पीछे कारण है कि कई ऐसी बीमारियां हैं जिनके उपचार में दवा के साथ योग की महती भूमिका है। प्रदेश के एकमात्र स्वास्थ्य संस्थान में फिजियोलॉजी विभाग की ओर से योग के लिए बकायदा योग लैब भी तैयार करवाई गई है। योग के फायदों को देखते हुए नित लोग योग की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पेश है दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट..।

रोहतक में तमाम ऐसी व्यवस्थाएं हैं, जो इस शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिला सकती हैं। हालांकि यह व्यवस्थाएं स्मार्ट सिटी के लिए काफी नहीं हैं। इसके लिए जरूरी है कि यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी व यातायात की सकुशल पूर्ण व्यस्वस्था हो। साथ ही जरूरी है कि व्यवस्था के साथ लोग भी इसके लिए जागे और आगे बढ़ें। क्योंकि बिना जनभावना के कोई भी व्यवस्था का उचित संचालन आसान नहीं है। साथ ही जरूरी है किसी भी संस्थान के आलाधिकारियों एवं कर्मचारियों कार्य के प्रति ईमानदारी व इच्क्षाशक्ति हो। जो अपने संस्थान को ऊचाइयों को ले जाने में निरंतर अग्रसर रहे हैं। ऐसे में शहर में जब स्वास्थ्य व्यवस्था की बात आती है तो पीजीआइएमएस में का नाम सबसे ऊपर आता है। पीजीआइ भी अब स्मार्ट बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है, क्योंकि यहां पर इलाज के लिए योग से भी मरीजों के उपचार की पहल की गई है।

ऐसे बनेंगे स्मार्ट

योग से दूर होगा मधुमेह

लोगों की बदल रही जीवन शैली के कारण मधुमेह रोग अब आम हो गया है। इसकी गिरफ्त में लोग तेजी से आते जा रहे हैं। वहीं, ऐसे रोगियों से चिकित्सक एवं दवा कंपनियां जमकर कमाई भी कर रही हैं। अब यह रोग योग से भी दूर हो सकता है। इसको नियंत्रित रखने में योग भी काफी प्रभावी साबित हो रहा है। मधुमेह की चिकित्सा में यह ध्यान रखना जरूरी होता है कि रोगी पर्याप्त श्रम करे, उसका आहार नियंत्रित हो, वह तनाव मुक्त रहे। साथ ही उसका पाचन संस्थान सुव्यवस्थित कार्य करे व मधुमेहजन्य हो व्यार्थियां अक्सर उत्पन्न हो जाती है वे नियंत्रित रहें। ऐसे में रोगी जब भी योग को अपनाएं चिकित्सों या योग गुरु से सलाह जरूर ले लें। क्योंकि रोगी की आयु व रोगी अवस्था के अनुसार ही योग निर्धारित है।

यह आसन दिलाएगा छुटकारा

-प्राणायाम

-सूर्यनमस्कार

-मिट्टी चिकित्सा

-जल चिकित्सा

-मालिश चिकित्सा

-सूर्य किरण चिकित्सा

-व्यायाम चिकित्सा

-आहार चिकित्सा

सामान्य व्यक्ति को 2000 कैलोरी ऊर्जा की जरूरत

मधुमेह रोगी को आहार पर काबू रखना चाहिए। एक सामान्य भार के व्यक्ति को जो शारीरिक कार्य नहीं करता लगभग 2000 कैलोरी, मध्यम काम करने वालों को लगभग 2500 व अधिक कार्य करने वाले मरीज को करीब 3000 या इससे अधिक कैलोरी की जरूरत पड़ती है।

योग चिकित्सक के अनुसार रोगी की दैनिक आहारचर्या

प्रात : करेले का रस एक से दो औस।

नाश्ता : बिना मलाइ का दूध 250 से 400 मिलीग्राम या मट्ठा। इसके इसके अलावा अंकुरित चना, मूंग, मेथी या ताजे आंवले का रस।

दोपहर खाना : रोटी, 25 से 50 ग्राम हरी सब्जी, सलाद, मूंग की दाल, दही आदि।

सायंकाल : भुने हुए चले 30 ग्राम, सब्जी का सूप या मट्ठा एक गिलास।

रात्रि का भोजन : दोपहर की तरह, लेकिन रात्रि में दही से परहेज करें।

योग के यह भी फायदे

- यौगिक स्वास्थ्य पद्धति के अंतर्गत शारीरिक ढांचे व उसमें अंतर्निहित पूरे मांसपेशियों का व्यायाम होता है।

- आंतरिक दाब में परिवर्तन को भी यौगिक स्वास्थ्य पद्धति की विशेषता होती है।

- योग के अभ्यास में बहुत कम ऊर्जा व धन की आवश्यकता होती है।

- योगाभ्यास गरीब व अमीर, स्त्री-पुरुष व सभी आयु के लोग कर सकते हैं।

- योग का अर्थ मोक्ष की प्राप्ति व वैज्ञानिक दृष्टि से रोगों का निवारण है। इससे तन व मन दोनों को लाभ मिलता है।

- योग से अनेक विशिष्ट क्रियाओं पर बल दिया जाता है। इससे कई रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है।

इन रोगों में योग देगा आराम

रोग योग

उद्वेग अमीबारुग्णता

अवसाद विक्षिप्ता

त्वचा रोग संधिशोध

कब्ज तमक श्वास

मधुमेह ग्रीवा कशेरूकासंधिशोध

अर्धांगवात जठर शोध

क्षोभ्य आंत्र संलक्षण उच्च रक्त चाप

पेप्टिक व्रण मोटापा

गृध्रसी श्वसनपथ संक्रमण

अधोवायु अनिद्रा

मिर्गी स्थितिज विकार।

योग से रोग भगा रहा फिजियोलॉजी विभाग

शहर में लोगों के तन मन को शुद्ध व दुरुस्त रखने के लिए कई योग शिविर चलाए जा रहे हैं। अक्सर कुछ पार्कों में भी लोगों को योग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शहर के मान सरोवर पार्क में सुबह-सुबह लोग पहुंच कर योगाभ्यास करते नजर आते हैं। इसके अलावा प्रदेश का एकमात्र स्वास्थ्य संस्थान पीजीआइएमएस में भी योग की लहर दौड़ पड़ी है। फिजियोलॉजी विभाग की ओर से इसके लिए बकायदा नई ओपीडी भी चलाई जा रही है। इसके अलावा विभाग में योग क्लास भी चलाई जा रही है, लेकिन नेचुरोपैथी एवं योगा को पीजीआइ में लागू कराने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। यह व्यवथा यहां पर विभाग की हेड एवं सीनियर प्रोफेसर डॉ. सुषमा सूद के कई वर्षों के अथक प्रयास से लागू हो सकी है। अब यहां पर ओपीडी या अन्य विभागों द्वारा रेफर रोगियों को तो योग कराया ही जाता है साथ ही छात्र-छात्रों की इसके लिए क्लास भी ली जाती है।

2009 में शुरू हुई योग की कक्षाएं

फिजियोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा सूद की पहल पर सितंबर 2009 में यहां पर नेचुरोपैथी एंड योग की शुरुआत हुई। इसको सेंट्रल काउंसिल ऑफ रिसर्च इन योगा एंड नेचुरोपैथी (सीसीआरवाइएन) से मान्यता भी मिल गई। इसके बाद से यह निरंतर जा रही है। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के चौधरी रणबीर ¨सह नई ओपीडी के रूम नंबर 104 व 107 में ओपीडी चलाई जाती है। जो सप्ताह में छह दिन चलती है। इसमें एक कंसलटैंट रहता है।

योग से इन रोगों का किया जाता है इलाज

-डायबिटीज मिलेनियस

-आब्सिटी

-हाइपरटेंशन

-अरथीरीटिस

-सर्वाइकल एंड बैक पैन

-लंबर स्पोंडीलोसिस

-अस्थामा

-कॉन्स्टीपैशन

-गैस्ट्रिटीस

-डिप्रेशन

-माइग्रेन

-हाइपोथीरोडिज्म

-स्काइटिका

-इंसोम्निया

बढ़ता ही जा रहा योग के प्रति लोगों का झुकाव

दवा की एलर्जी व साइड इफेक्ट से बचने के लिए लोगों में अब जागरूकता बढ़ती जा रही है। पीजीआइएमएस फिजियोलॉजी विभाग की ओपीडी में आए मरीजों की संख्या को देखने से पता चलता है कि अब योग का क्रेज बढ़ने लगा है। इस विभाग में योग एंड नेचुरोपैथी की शुरुआत सितंबर 2009 में हुई थी। मार्च 2010 तक मात्र 673 मरीज ही आए। इसके बाद अप्रैल 2010 से मार्च 2011 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 1608 हो गई। वहीं, अप्रैल 2011 से मार्च 2012 तक योग गुरू की शरण में 1880 लोग पहुंच गई। इसके बाद तो मरीजों की संख्या बढ़ते ही गई। आकड़ों के अनुसार अप्रैल 2012 से मार्च 2013 तक यह संख्या बढ़कर 2584 हो गई। इसके बाद अप्रैल 2013 से मार्च 2014 तक 3393 मरीज योग करने पहुंचे थे।

इतने मरीजों ने अपनाया योग

वर्ष मरीजों की संख्या

2009-10 673

2010-11 1608

2011-12 1880

2012-13 2584

2015-14 3393

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