प¨रदों की दुनिया: नॉर्दरन शॉवलर

परिवार: एनाटीडी

जाति: स्पैटुला

प्रजाति: क्लीपीटा

लेख संकलन: सुंदर सांभरिया, ईडेन गार्डन रेवाड़ी:

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नॉर्दरन शॉवलर प्रवासी पक्षी है, जो सर्दियों में भारत के अलग-अलग हिस्सों में देखे जा सकते है। यह द्विरूपी प्रजाति है। इसमें नर व मादा रंग व आकार में भिन्न दिखते हैं। नर पक्षी के शरीर के पंखों का रंग प्रजनन का समय आते-आते काफी बदल जाता है। नर पक्षी की गर्दन व सिर का रंग चमकीला गहरा हरा, छाती सफेद तथा बाकी शरीर का हिस्सा लाल भूरा होता है। उड़ते समय आगे के पंख धुंधले नीले दिखते हैं। उड़ते समय पंखों के पीछे की तरफ हरे रंग का बैंड दिखाई देता है, जबकि मादा कर रंग गहरा भूरा होता है। इसके पंख स्लेटी नीले तथा पंखों में उड़ते समय नर पक्षी की तरह हरे रंग की एक पट्टी दिखाई देती है। इसकी चोंच की बनावट बेलचे जैसी होती है। चोंच के अंदरूनी भाग में चारों तरफ कंघी जैसी बनावट होती है, जिसकी सहायता से ये छोटे जलीय जीवों, प्लवक व अन्य जलीय वनस्पति के बीजों आदि को छान कर खाते है। छान कर खाते है भोजन

यह सर्वभक्षी पक्षी है। ये कम गहरे पानी में तैरते समय अपनी आधी चोंच को डूबो कर रखते है। ऐसा ये पानी के अंदर से अपने भोजन को चोंच की आकृति व बनावट से छानकर खाने के लिए करते है। भारत में अपने प्रवास के दौरान ये छोटे समूह में अन्य बतखों के साथ झीलों, पानी के बड़े टैंकों तथा जोहड़ों आदि जगहों पर दिखते हैं। भोजन करने के बाद ये पानी के किनारे या पानी के बीच छोटे टापुओं पर बैठ जाते हैं। ये पानी के नीचे कीचड़ वाली दलदली जगहों पर रहना पसंद करते हैं। पक्षियों की इस प्रजाति के प्रजनन का समय अप्रैल से जून तक होता है। इस दौरान ये भारत व दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से वापस अपने प्रजनन क्षेत्रों में एकत्रित हो जाते है। ये मुख्यत: यूरोप, दक्षिण अमेरिका व मध्य एशिया में प्रजनन करते हैं। ये प्रजनन के समय कम गहरे जल क्षेत्रों, पानी में डूबी वनस्पति वाली जगहों पर एकत्रित होते है। इस दौरान नर पक्षी अपना क्षेत्र निर्धारित करके रहता है तथा यह अपने क्षेत्र में किसी दूसरे नर पक्षी को नहीं आने देता। नही उड़ पाते कई सप्ताह

मादा पक्षी जमीन पर एक छोटा गड्ढा बना कर उसमें घास व अन्य वनस्पति से घोंसला बनाती है। मादा पक्षी 9 से 12 तक अंडे देती है तथा स्वयं ही अंडों को सेती है। अंडों से चूजों के निकलने के कुछ घंटे बाद ही मादा सभी चूजों को पानी की तरफ लेकर जाती है। प्रजनन क्रिया के बाद सभी नर पक्षी घोंसलों से दूर बड़ी वनस्पति वाली जगहों पर एकत्रित हो जाते है। इस दौरान इनके पंख झड़ने शुरू हो जाते है तथा कुछ सप्ताह तक ये उड़ नहीं पाते। इस दौरान ये पक्षी रात के समय शिकारियों से बचने के लिए बड़ी वनस्पतियों के अंदर छुपे रहते है। धीरे-धीरे इनके नए पंख आने लगते है। जब ये प्रवास के नजदीक आते है। इनके नए पंख आ चुके होते हैं। इस दौरान इनके पंखों का रंग धुंधला होता है। जैसे-जैसे ये प्रजनन समय की तरफ बढ़ते है, ये पहले जैसा सुंदर आकर्षक रंग ग्रहण कर लेते है।

Posted By: Jagran

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