जागरण संवाददाता, गुरुग्राम:

प्राइवेट बसों को परमिट दिए जाने का विरोध व अन्य मांगों को लेकर मंगलवार देर रात से हड़ताल पर गए रोडवेज कर्मचारियों का चक्का जाम दक्षिण हरियाणा में कोई खास असर नहीं छोड़ सका। बुधवार को दिन में कई रूट पर बसें चलती रहीं। देर शाम आंदोलनकारी कर्मचारियों ने हड़ताल सफल होने का दावा किया, वहीं विभागीय अधिकारियों ने इसे मिला जुला बताया।

गुरुग्राम में कर्मचारी नेता मंगलवार शाम से ही बसों को डिपो से न निकलने देने का प्रयास कर रहे थे, उन्होंने कुछ बसों रोक भी लिया था। हालांकि बुधवार सुबह विभागीय अधिकारियों की सख्ती के कारण हड़ताली कर्मचारी पूरी तरह से सफल नहीं हुए। रोडवेज के महाप्रबंधक गौरव आंतिल ने अधिकारियों के साथ रणनीति बनाकर कुछ चालकों को ड्यूटी पर आने को राजी कर लिया। अधिकारियों का दावा है कि सिटी की 54 बसें चलीं, जबकि शहर से बाहर के रूट पर 90 बसों में 32 बसें चलीं। फरीदाबाद में प्रदेश सरकार के एस्मा लागू करने से कर्मचारी संगठन दबाव में नजर आए। जिला प्रशासन ने सभी रूटों के लिए पर्याप्त संख्या में बसों के इंतजाम किए थे। एहतियातन बस स्टेशन पर रैपिड एक्शन फोर्स और पुलिस बल तैनात रहा।

पलवल में बुधवार को सभी रूटों पर हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संघ व हरियाणा रोडवेज कर्मचारी महासंघ की संयुक्त संघर्ष समिति ने मंगलवार को ही हड़ताल से अलग रहने की घोषणा की। सभी रूट पर बसें चलीं।

सोनीपत में 171 बसें अपने-अपने रूट पर गई। हड़ताल में केवल इन्टक यूनियन से संबंधित 21 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया, जिनकी महाप्रबंधक ने गैरहाजिरी लगा मुख्यालय रिपोर्ट भेजी।

रेवाड़ी में रोडवेज कर्मचारियों ने 25 घंटे तक बसों के पहिये थामे रखे। प्रशासन व पुलिस कहीं न कहीं कर्मचारियों पर हावी रहे जिसके चलते बुधवार शाम को 5 बजे ही कर्मचारियों को अपनी हड़ताल खोलनी पड़ी। एस्मा का उल्लंघन करने पर रोडवेज जीएम की तरफ से 14 कर्मचारियों पर शहर थाना में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। रोडवेज महाप्रबंधक बलवंत ¨सह गोदारा का कहना है कि हड़ताल के बावजूद सुबह से 12 बसें ऑन रूट थीं तथा दोपहर तक 25 बसों को ऑन रूट कर दिया गया था।

नूंह में हड़ताल का असर नहीं दिखाई दिया। विभाग के सभी कर्मचारी काम पर दिखाई दिए। जिले में सभी रूटों पर 85 बसें सुचारू रूप से चलीं।

नारनौल में हड़ताल के दौरान कर्मचारियों पर केस दर्ज किए, कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया व हाल ही में भर्ती हुए चालकों को जबरदस्ती रूट पर चलाने के बाद भी बसें दौड़ नहीं पाईं। हालांकि हड़ताल से यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। कारण यह कि नारनौल में कुछ रूटों पर तो पहले से ही परमिट की बसें दौड़ रही हैं। साथ ही राजस्थान रोडवेज की बसें भी यहां से गुजरती हैं। प्रशासन ने दावा किया कि 151 में से 51 बसों को रूट पर दौड़ाया गया।

Posted By: Jagran