जागरण संवाददाता, रेवाड़ी : जापान में अनुपयोगी वस्तुओं को बेहतर ढंग से सदुपयोग किया जाता है। इसकी पालना अगर हम भी अपने देश में करना सीख लें तो निश्चित तौर पर तरक्की का प्रतिशत काफी बढ़ सकता है। यह कहना है कि रेवाड़ी के माउंट लिट्रा जी स्कूल की शिक्षिका ज्योति शर्मा का। ज्योति शर्मा हाल ही में थाइलैंड में आयोजित पांच दिवसीय 'अंतर्राष्ट्रीय जापानी कैंप' में भाग लेकर लौटी हैं। ज्योति ने बताया कि शिविर में भारत के साथ ही थाइलैंड, म्यांमार, स्पेन, वियतनाम, जापान, आस्ट्रेलिया, मेक्सिको, लाओस सहित 11 देशों के 11वीं व 12वीं कक्षा के विद्यार्थी व जापानी भाषा शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। उन्हें वहां जापान की स्वच्छता कार्यप्रणाली से अवगत कराया गया।

अपने अनुभव साझा करते हुए जापानी भाषा की शिक्षिका ज्योति शर्मा ने बताया कि थाई शिक्षा मंत्रालय और जापानी फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में भारत के कुल तीन शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। पांच दिवसीय कार्यशाला में देश-विदेश के कुल 152 विद्यार्थी व 52 शिक्षक पहुंचे थे। 30 अप्रैल से 5 मई तक आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य रूप से उत्पादन, उपयोग और पुनरावृत्ति के प्रयोग, नए आयामों और स्त्रोतों को सीखने के साथ एक दूसरे देशों की कला, संस्कृति, शिक्षा और व्यवस्थापन के बारे में विचार विमर्श किया गया। पांच दिनों के इस कैंप में अलग-अलग दिनों में अलग-अलग कार्य दिए गए। इसमें बच्चों व शिक्षकों ने पुराने तरीकों के साथ नए तरीकों को भी सम्मिलित किया। नए तरीके के कचरा पात्र बनाए गए। इसके माध्यम से यह भी सीखने को मिला कि अनुपयोगी वस्तुओं का अलग-अलग ढंग से कैसे सदुपयोग किया जा सकता है, उन्होंने बताया कि जापान में उत्पादन, उपयोग और पुनरावृत्ति को बढ़ावा दिया जाता है ताकि अनुपयोगी वस्तुओं का बेहतर ढंग से उपयोग किया जा सके। कार्यशाला से लौटने पर स्कूल प्रबंधन की ओर से उन्हें बधाई दी गई। स्कूल चेयरमैन डॉ. पवन गोयल, प्रबंधक डॉ. गुंजन गोयल, प्रधानाचार्य अजय कुमार आदि ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि कार्यशाला का विद्यार्थियों और संस्थान के शिक्षकों को जानकारी देने के साथ व्यवहार में लागू करने का अवसर मिलेगा।

By Jagran