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तैयारी

-जिला प्रशासन की ओर से गठित की गई है कमेटी

=समिति को 14 जनवरी तक सौंपेगी होगी अपनी रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, रेवाड़ी:

एम्स को लेकर जमीन की तलाश खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। जिला प्रशासन की ओर से अब बिशनपुर गांव में एम्स के लिए जमीन अधिग्रहण की संभावना तलाशी जा रही है। बिशनपुर गांव की जमीन की स्थिति जानने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त राहुल हुड्डा के नेतृत्व में समिति का गठन कर दिया गया है। यह समिति 14 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 7 जुलाई 2015 को सीएम ने की थी घोषणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 7 जुलाई 2015 को बावल में आयोजित एक जनसभा में मनेठी में एम्स बनाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही एम्स के सपने को साकार करने के लिए क्षेत्र के लोग लगातार प्रयासरत हैं लेकिन मामला आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। मनेठी गांव के लोगों ने लगातार धरना प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला तो 28 फरवरी 2019 को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने मनेठी में एम्स निर्माण को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण समिति की टीम मनेठी पहुंची थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा कि मनेठी गांव की पंचायती जमीन अरावली वन क्षेत्र की है, जिस पर कोई निर्माण नहीं हो सकता। मनेठी का प्रोजेक्ट कैंसिल होने के बाद पोर्टल के माध्यम से सरकार ने माजरा व इसके आसपास 200 एकड़ जमीन मांगी थी। पोर्टल पर किसान 200 एकड़ से भी अधिक जमीन एम्स के लिए देने को अपनी मंजूरी दे चुके हैं। माजरा के ग्रामीण अपनी जमीन का प्रति एकड़ 50 लाख रुपये मुआवजा मांग रहे हैं लेकिन सरकार 29 लाख देने पर अड़ी है। गतिरोध पैदा होने पर अब अन्य जगहों पर एम्स के लिए जमीन तलाशी जा रही है। बिशनपुरा के लिए बनाई कमेटी जिला नगर योजनाकार देवेंद्र पाल की ओर से एम्स को लेकर हाल ही में एक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि बिशनपुरा में एम्स के लिए जमीन की संभावना देखी जानी है। वहीं, अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। कमेटी 14 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट देगी। बिशनपुरा की तरह ही खोरी व मसानी में भी जमीन का विकल्प तलाशा जा रहा है।

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एम्स को लेकर नाटक कर रही है सरकार: विद्रोही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि साढ़े पांच सालों से केंद्र व प्रदेश सरकार एम्स को लेकर सिर्फ नाटक ही कर रही है। सरकार ने पहले मनेठी की जमीन का प्रोजेक्ट रद किया और बाद में माजरा में 200 एकड़ से अधिक जमीन को पोर्टल पर रजिस्ट्रड कराया। अब किसानों को उचित मुआवजा देने की बजाय दूसरी जगहों पर जमीन तलाशी जा रही है। सरकार को विवाद सुलझाना चाहिए। जान-बूझकर इस मुद्दे को लटकाया जा रहा है। विद्रोही ने कहा है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार एम्स के नाम पर और अधिक खेल न करें तथा माजरा के लोगों को 50 लाख रुपये का मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहित करे ताकि एम्स निर्माण शुरू हो सके।

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