जागरण संवाददाता, रेवाड़ी: एक बच्ची जब दूसरी कक्षा में थी तो नियम 134ए के तहत उसे स्कूल अलॉट नहीं किया गया। बच्ची की मां ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तीन साल के बाद अब कोर्ट ने निर्णय दिया है कि बच्ची जिस स्कूल में वर्तमान में पढ़ रही है वहीं पर उसे नियम 134ए के तमाम लाभ उपलब्ध कराए जाएं। बच्ची वर्तमान में पांचवीं कक्षा में हो चुकी है। जिला कोर्ट ने इस तरह का यह पहला निर्णय दिया है। दूसरी कक्षा में नहीं दिया गया था स्कूल

शहर के मोहल्ला साधुशाह नगर निवासी बबीता ने अपनी बेटी मानसी का वर्ष 2016 में नियम 134ए के तहत फार्म भरवाया था। मानसी ने परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शिक्षा विभाग की ओर से पास हुए विद्यार्थियों का रिजल्ट तो जारी कर दिया था लेकिन उनको स्कूल अलॉट नहीं किए गए। बबीता अपनी बच्ची के दाखिले के लिए विभाग के चक्कर लगाती रही लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। न्यायालय में शिक्षा विभाग के अधिकारियों व पुलिस विभाग को पार्टी बनाया गया। न्यायाधीश संप्रीत कौर ने इस मामले की सुनवाई की। बच्ची मानसी अब पांचवीं कक्षा में शहर के ही एक निजी स्कूल में पढ़ रही है। न्यायाधीश संप्रीत कौर ने इस मामले में निर्णय देते हुए कहा है कि बच्ची मानसी वर्तमान में जिस निजी स्कूल में पढ़ रही है वहीं पर उसे नियम 134ए का लाभ दिया जाए। यानि उसे नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराई जाए। इसके साथ ही अगर परिवार के लोग चाहते हैं कि उन्हें पिछले तीन साल का हर्जा खर्चा मिले तो वे डैमेज सूट भी कोर्ट में डाल सकते हैं।

मामले में पैरवी करने वाले अधिवक्ता राजरतन ने बताया कि कोर्ट का यह अनूठा निर्णय है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी के कारण बच्ची व उसके परिवार के लेागों को परेशानियां झेलनी पड़ी है लेकिन आखिरकार अब न्याय मिल गया।

Posted By: Jagran

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